“दिल जो हैं आग लगा दूँ”- जॉन एलिया की दर्द भरी गजल।

 दिल जो है आग लगा दूँ उस को  और फिर ख़ुद ही हवा दूँ उस को  जो भी है उस को गँवा बैठा है  मैं भला कैसे गँवा दूँ उस को  तुझ गुमां पर जो इमारत की थी  सोचता हूँ कि मैं ढा दूं इस को  जिस्म में आग लगा दूं उस के और फिर … Read more

जया ‘नरगिस’ की गजल “बहरा पानी।”

 किसी की आँखों में सागर से भी गहरा पानी है  अब्र बनके जो दिल पर मेरे ठहरा पानी  बिना बुलाए ही आता है सूरते-सैलाब  पुकारे प्यास तो बन जाता है बहरा पानी  सुलगती धूप का तय तो सफर किया लेकिन  जहाँ उमीद थी निकला वहीं सहरा पानी  हवा के तेज़ थपेड़ों ने नाव जब उलटी  … Read more

जॉन एलिया की शायरी “दिल जो दीवाना नहीं।”

 दिल जो दीवाना नहीं आख़िर को दीवाना भी था  भूलने पर उस को जब आया तो पहचाना भी था  जानिया किस शौक़ में रिश्ते बिछड़ कर रह गये  काम तो कोई नहीं था पर हमें जाना भी था  अजनबी-सा एक मौसम एक बेमौसम-सी शाम  जब उसे आना नहीं था जब उसे आना भी था  जानिये … Read more