हर व्यक्ति को डायरी क्यों लिखनी चाहिए।

    लिखा-लिखाया शिकायतों का शगूफा था पूरा….

     उसकी डायरी महज एक डायरी नहीं थी।                                                                                –  आवा

इस दुनिया में हजारों तरह के लोग हैं और उनके हज़ारों तरह के अलग अलग शौक हैं। किसी को नृत्य पसंद है, किसी को क्रिकेट का शौक है, कोई रेस पसंद करता है कोई खाना बनाना तो कोई लिखना। 

मैं ये नहीं कहूँगी कि ये सारे शौक सभी को पसंद करने चाहिए लेकिन एक शौक है जो सभी को दुनिया के हर इंसान को पसंद करना चाहिए वो है डायरी लेखन । क्योकि यह विधा सिर्फ एक शौकिया चीज़ ना होकर दवा हैं , हर उस बीमारी की दवा जो आपके जहन में है और दिमाग को दूषित किये जा रही है जिसे आप किसी से कह नहीं पा रहे है , जो आपको अकेला करें जा रही हैं , तो डायरी सिर्फ एक शौक नहीं दवाई भी है और सिर्फ दवाई ही नहीं दोस्त भी है आपकी।                                        

और दोस्त ऐसी वैसी नहीं बल्कि भरोसेमंद , ईमानदार और राहतभरी। जिस पर आप यकीन कर सकते है कि वो आपकी बातें किसी से नहीं कहेंगी, और आप जो भी कहेंगे चुपचाप सुनती रहेगी , आप उससे चाहे जब बात करना चाहे आपके लिए हाजिर हो जाएगी । दिन-रात, सुबह-शाम , आँसू ख़ुशी हर पल आपके लिए उपस्थित रहेगी, और आपसे कभी कोई शिकवा-शिकायत नहीं करेगी कोई इच्छा नहीं जाहिर करेगी बस ख़ामोशी से आपकी बात को सुनती रहेगी अपना कुछ भी नहीं कहेगी आप से।                                                                  

हिंदी साहित्य में एक समय तो डायरी विधा का काफी बोलबाला था , रघुवीर सहाय, धीरेन्द्र वर्मा, मोहन राकेश आदि हिन्दी के लेखकों ने इस विधा में काफी नाम कमाया है।दुनिया की सबसे साहसी लड़की कही जाने वाली अन्ना फ्रैंक सिर्फ अपनी एक डायरी की वजह से इतिहास ने अमर हो गई । सोचिए अगर वे डायरी ना लिखती होती तो आज के विश्व को हिटलर की क्रूर यहूदी निति का शायद ही इतना ज्यादा पता होता ।                   

वैसे तो आज के समय में काफी कम लोग डायरी लिखते हैं शायद इसकी वजह समय की कमती होना है एक बहुत व्यस्त जिन्दगी होना है, लेकिन आप यकीन किजिये इस दौर में अगर आप ने डायरी से दोस्ती नहीं की तो आप कुछ वक्त बाद खुद को अकेला पाएंगे क्योंकि आज के समय में किसी के पास इतनी फुर्सत नहीं है कि वो आपकी बातें सुने । सिर्फ एक डायरी ही है जो आपकी सुनेगी भी और किसी को सुनाएगी भी नहीं।

 psychiatrist और psychologist भी मानते है डायरी लिखने से आपके तनाव में जाने का प्रतिशत काफी कम रहता है , और डायरी लिखने वाले लोग,डायरी ना लिखने वालोंं की अपेक्षा अधिक क्रियात्मक होते है तथा उनसे अधिक खुश भी रहते हैं।

आपने एक बहुत ही कारगर ट्रिक जिसकी सलाह अधिकतर मनोचिकित्सक देतें हैं “एक पन्ने पर वो बात लिखना जो आपको परेशान कर रही है और फिर वो पन्ना जला देना” करने की कोशिश की है। ये काफी असरदार साबित होती है ये भी डायरी लेखन का ही एक भाग है। डायरी लेखन का सर्वाधिक फायदा यही है कि आप खुद से प्यार करने लगते है डायरी लिखते-लिखते।

आज के इस ब्लॉग में मैं बस इतना ही लिखूँगी और इस ब्लॉग के अगले पार्ट में मैं “डायरी लेखन की शुरुआत कैसे करें “ करें और “डायरी लेखन के बेहतरीन फायदे ” आपके सामने लेकर आऊँगी तब तक आप अपने आप से डायरी लिखना आरम्भ कर दें।

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