तो वो कौन है……? पार्ट – 6

 अभी तक आपने पढ़ा कि सिद्धांत का लीना से लगाव बढ़ चुका था अब वो रश्मि से इतनी बात नहीं करता था । उसे लगने लगा था कि हो न हो रश्मि और श्री भी यही चाहती हैं कि वो लीना के साथ ही रहे। उसका शक तब यकिन में बदल गया जब उन के डैडी ने रश्मि से उसके रिश्ते को मना कर दिया । अब वो सारा ध्यान लीना पर ही लगाने लगा। उसने सोचा कि इससे पहले लीना का मन बदल जाये उसे रिश्ते की बात कर लेनी चाहिए। अब आगे-

सिद्धांत ने अब ठान लिया था कि वो और देर नहीं करेगा इसी बात को गांठ बाँध कर वो आज घर से निकला था । उसे थोड़ा अजीब लग रहा था कि कल जिस घर में छोटी बहन से शादी की बात करने गया था आज उसी घर में बड़ी बहन का हाथ मांगने जा रहा है। अगर जाते ही उसकी मुलाकात रश्मि से हो गई तो ? क्या सफाई देगा उसे ? माना कि लीना ने कहा है कि उसके डैड तैयार है लेकिन वो भी तो सवाल करेंगे कि मेरी छोटी बेटी में क्या कमी दिखी तुममें? और वो श्री तो उसे देखते ही बेवफा बुलायेगी।क्या करुँ? जाऊं या नहीं ? ….नहीं गया तो लीना नाराज होगी कहेगी इतनी हिम्मत नहीं है तो प्यार करने का ढोंग क्यूँ? नहीं मुझे जाना तो चाहिए …हाँ मैं जाऊंगा बस रश्मि से सामना ना हो मेरे भगवान् !

सिद्धांत जब उनके घर पंहुचा तो देखा कि वहाँ कोई नहीं है बस चौकीदार है। उससे पता चला कि मिस्टर सिंह अपनी बेटियों के साथ कहीं गए हैं। 

ऐसा नहीं हो सकता लीना मुझे बुलाकर खुद नहीं जा सकती वो किसी का टाइम नहीं बर्बाद करती वो जरूर घर पर ही होगी उसका इंतजार कर रही होगी । सिड ने मन ही मन सोचा।

अरे आ गए तुम ! लीना थी हाथ में फूलों का गुलिस्ता लिये खुद हाथों से चुने हुए लग रहे थे ताजे ताजे फूल।

तुम यहाँ बाहर हो, और चौकीदार बोल रहा था कि तुम सब कहीं गए हो ?

मैं नहीं गई डैडी गए है श्री और रश्मि को लेकर कोई काम था उन्हें।

अच्छा , तुम क्यों नहीं गई? सिड ने शरारती अंदाज़ में पूछा।

हाँ जैसे कि तुम्हें पता ही न हो कि क्यों नहीं गई / लीना ने उसकी अपेक्षा के अनुसार ही उत्तर दिया।

नहीं सच में नहीं पता बताओ ।

चुप करो और मेरे साथ गार्डन ने घूम कर ताजी खुश्बू का मज़ा लो और ये बुके भी। लीना गुलदस्ता बैन्च पर रखकर वापस गार्डन में घूमने लगी। 

अच्छा सुनो मैं क्या कह रहा था … सिड उसके पीछे चला ….चलो कहीं और चलते हैं।

कहाँ?

जहाँ तुम चाहो?

तुम्हारे घर !

ओके, चलो वो लोग आएँगे तो कॉल तो करेंगे ही तब हम वापस आ जाएँगे।

हाँ ये ठीक रहेगा।

गाड़ी स्टार्ट हुई और दोनों पक्षी एक सुहाने से सफर के लिए निकल पड़े। 

अच्छा तुम्हारे घर की तरफ जो शॉर्टकट है उधर से चलेंगे।

लेकिन मैं उधर से नहीं जाता।

क्यों?

काका माना करते है इसीलिए।

तो काका को नहीं बताएंगे बस चुप के से जाएँगे और चुपके से वापस भी आ जाएँगे । 

ठीक है यार चलो । सिड ने गाड़ी उसी रास्ते की तरफ मोड़ दी ।

सिड के फोन पर रश्मि का no चमकने लगा ।सिड ने कॉल पिक की तो रश्मि ने उसे किसी जरुरी काम से बुलाया था बोल रही थी किसी से मिलवाना है। (रिश्ता हुआ या नहीं पर दोनों मे दोस्ती अब भी थी।)लेकिन लीना मना करने लगी उसने कहा कि वो शाम से पहले घर नहीं जाएगी। काफी समझाने के बाद लीना इस बात पर राजी हुई कि वो लोग फिर अगले दिन उधर जरूर जाएँगे। रश्मि ने किस से मिलवाने को कॉल की थी ये न लीना को पता था न सिद्धांत को कार लीना के घर की तरफ वापस मुड़ गई।

जब वो वहाँ पंहुचा तो रश्मि को डोर के सामने ही खड़ा पाया जो शायद उसी के आने का इंतजार कर रही थी। सिड कार से उतर कर रश्मि के पास चला गया जबकि लीना कार के पास ही खड़ी रही।

रश्मि उसे लेकर घर के अंदर चली गई और पीछे से लीना भी चल दी।

किससे मिलने बुलाया था।

तुमने कहा था डैड से कि तुम्हें लीना के बारे में उनसे कुछ बात करनी हैं तो ….

हाँ करनी तो हैं।अब तक सिड को कोई हैरानी नहीं हुई थी और वो सोफे पर कसके जम चुका था।

डैड से बात करने से पहले , आप मुझसे भी तो बात कर लें। व्हीलचेयर पर बैठी एक लड़की सामने आयी तो बरबस ही सिड के मुँह से निकल गया” आप कौन है?”

इस सवाल पर वो इतना हैरान न हुआ हो लेकिन बाकी सब हैरान रह गए।

सिड ये मेरी बड़ी बहन लीना है । जिनके बारे में तुम्हें एक बार बताया था। रश्मि बोली।

ये लीना है? लेकिन ये तो … 

क्या ये तो….

नहीं ये तुम कोई मजाक कर रही हो ये लीना नहीं कोई और है , लीना तो चल सकती है अभी उसीके साथ तो मैं घूमने गया था।मैं लीना ही हूँ । आपने मुझे अपनी इमेजिनेशन में चलता देखा होगा क्योंकि मैं 5 सालों से तो इससे अपने आप तो उठी नहीं। ऐसा हो ही नहीं सकता। सिड चीखा।

श्री सही कहती है कि तुम पागल हो इसीलिए मैंने तुमसे रिश्ता तोड़ा था। कभी अकेले में बैठे घंटो बातें करते रहतें हो , कभी बेवकूफों की तरह छत पर बैठ कर हँसते हो, और ये तो हद ही हो गई अब तो तुम्हारी, मेरी बहन का नाम लेकर उसे पहचाननें से इंकार करते हो। 

रश्मि मैं सच कह रह….

तुम कुछ मत कहो किसी डॉ से मिलो और अपने इस पागलपन का इलाज करवाओ।

लेकिन इतने दिन मैं किस के साथ था फिर …?

पता नहीं तुम किस के साथ थे लेकिन तुम मेरे घर से अब जाओ क्योंकि मैं तुम्हारा पागलपन और नहीं सह सकती। रश्मि ने दरवाजा खोल कर उसे जाने के लिए कह दिया। वो बाहर निकला और उस लीना को ढूंढनें लगा जिसके साथ वो इतने दिनों से था। उसके जहन में तरह तरह के सवाल आने लगे वो अगर लीना नहीं थी तो इतने दिनों से इस घर में क्या कर रही थी ? क्या वो सिर्फ उसे ही दिखाई देती थी? हाँ याद आया…. मैंने तो उसे कभी विन्नी के बारे में नहीं बताया तो उसने पहली ही मुलाकात में उसके बारे में जिक्र कैसे किया था? वो कौन हो सकती हैं? ओह गॉड वो मुझे शार्ट-कट की तरफ ले जा रही थी अगर मैं आज चला जाता तो …? शायद फिर मैं बचता नहीं ….! कौन है वो … कहीं विन्नी तो नहीं …?

मुझे पता है कि जो सवाल सिड के जहन में घूम रहा है कहीं न कहीं आप भी उसी को सोच रहें होंगे कि वो कौन है..? जब वो लीना नहीं है … तो वो है कौन? क्या चाहती हैं सिड से किसकी रूह है वो जो सिद्धांत को हमेशा घेरे रहती है ? मकसद क्या है उसका? इन सब सवालों के जवाब आपको मिलेंगे तो वो कौन है के अगले पार्ट में।

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