थोड़ी-सी सच्चाई part-7

 अभी तक आप लोगों ने पढ़ा कि प्रणय की तबियत खराब होने के बाद उसकी माँ उसे गोवा जाने से मना कर देती है।गौरी भी उसे डांट देती है और कभी भी क्रिस्टीन का नाम ना लेने को कहती है। उसे खुद ये महसूस होने लगा है कि वो पागल है यही सोच के वो परेशान हो गया और फिर सो गया। उसकी नींद तब टूटी जब क्रिस्टीन ने उसे आवाज़ दी। क्रिस्टीन को देखते ही वो भड़क गया और उससे कहने लगा कि वो सिर्फ उसकी imagination है। अब आगे-

👉थोड़ी-सी सच्चाई part-1

👉थोड़ी-सी सच्चाई part-2

👉थोड़ी-सी सच्चाई part-3

👉थोड़ी-सी सच्चाई part-4

👉थोड़ी-सी सच्चाई part-5

👉थोड़ी-सी सच्चाई part-6

आप जो भी समझे मैं अब उस पर कोई आपत्ति नहीं करुँगी,क्योंकि मेरी वजह से पहले ही आपकी ये हालत हो चुकी है।मुझे इस बात का ज़रा भी ख्याल ना रहा की मेरे कारण आपकी लाइफ में दिक्कते खड़ी हो सकतीं हैं ,बिना ये सोचे समझे मदद लेने चली आयी आपसे।क्रिस्टीन ने प्रणय से माफ़ी के लहजे में कहा। लेकिन प्रणय अब भी खुद ही पे हँस रहा था और उस पर गुस्सा कर रहा था। मेरा दिमाग कितना ग्रेट है न ! अब देखो न जाने पूरे महीने भर में तुम जैसी देसियों कल्पनाएं करता हूँ मैं , कई सारी रचनाएं बनायीं है मैंने अपने इस पागल दिमाग से। वो फिर हँसा।

नहीं आपने कोई रचना नहीं बनाई बल्कि आप खुद एक बहुत खास रचना है गॉड की जो उसने हम लोगों की मदद के लिए बनाई थी। Do you know? You can see dead people. But आप सोचते हैं कि वे सभी आपकी रचनाएं हैं , मानने को तैयार ही नहीं हैं आप कि creation only god कर सकता है कोई और नहीं। क्रिस्टीन कहती जा रही थी और अब प्रणय अपनी हँसी भुला कर उसकी बातों पे हैरान होता जा रहा था। you are not a normal person because आप मरे इंसानों से बात कर सकते हो , महसूस कर सकते हो और उनकी मदद कर सकते हो । मेरी ही तरह कई और आपके पास मदद के लिए आए लेकिन आपने उनकी नहीं सुनी,वो भी अपने दिल में अधूरी ख्वाहिश लिए दुनिया से चलें गए जैसे मैं जा रही हूँ और कुछ आज भी भटक रहें हैं, हो सके तो उनकी मदद कर देना क्योंकि जिंदा लोगों की मदद करने वाले बहुत है इस दुनिया में मरे लोगों की हेल्प के लिए शायद ही कोई मिलता है।इतना कहकर वो पलटी ही थी कि प्रणय ने उसे रोक लिया you mean paranormal activist?

yes… 

But I have a mental illness, तो ऐसा कैसे हो सकता है कि दोनों एक साथ…

शायद आपकी supernatural power को ही आपकी बीमारी समझा जाता हो?

लेकिन मैं ही क्यों…..

god जितने भी लोगों को दुनिया में भेजता है उनका कोई ना कोई काम निश्चित करके भेजता हैं जो कुछ भी नहीं करता न उसके भी हिस्से काम जरूर होता है और ऊपर बैठा वो इसी बात का हिसाब लगाता है कि किसने अपना काम ईमानदारी से किया किसने नहीं । कोई ये नहीं पूछ्ता कि ये काम मुझे ही क्यों , क्योंकि या तो वो काम उस इंसान के लिए बनाया गया होता है या वो इंसान उस काम के लिए बनता है। और यहाँ पर आप इस काम के लिए बनाए गयें हैं। जब आप ये काम करने लगेंगे तो आपको भी अहसास हो जाएगा कि आप ही क्यों। वो थोड़ी देर चुप हो गई शायद किसी विचार में खो गई थी.. अब मैं चलती हूँ अपने एडी के पास, बात ना सही लेकिन उसे देख तो सकती ही हूँ। क्रिस्टीन मुस्कुरा दी।

मुझसे एडी का एड्रेस खो गया है.. धीमे से प्रणय बोला। क्या..? क्रिस्टीन को यकीन नहीं हुआ की जब इतना आसान था सब कुछ तब भी तो वो सही से राजी ना था संग चलने के लिए और अब जब सब कुछ मुश्किल हो गया तो वो चलने को कह रहा है। “तुम्हारी फैमिली तुम्हें मना कर चुकी है इसके बावजूद..!

अभी तुम्हीं ने कहा न कि ऊपरवाला सबके दिए कामों का पूरा हिसाब रखता है , इस हिसाब से मैं पहले से ही शून्य हूँ और मैं माइनस नहीं होना चाहता,पहले ही बहुत देर कर दी ये समझने में कि इतिहास के मुर्दे मेरे दिमाग पर क्यों छप जातें हैं ,अब समझ चुका हूँ तो अब ज़रा भी देर नहीं। 

तुम्हारी माँ और…

मैं उन्हें इस वक्त नहीं मना पाऊँगा और न कुछ बता पाऊँगा।

तो जाओगे कैसे?

मैं उसके लिए तैयार हूँ।

अगली सुबह प्रणय की जिन्दगी में एक नया सवेरा लेकर आयी उसने पहली बार महसूस किया कि हाँ वो भी इस दुनिया में आता है , बाकी लोगों कि तरह उसका भी कुछ वजूद है सबसे बड़ी बात तो उसने ये महसूस की वो बीमार नहीं है , पागल नहीं है वो भी साधारण है। प्लेन जितनी ऊंची उड़ान ले रहा था प्रणय की ख्वाहिशें उतनी ही बुलंद होतीं जा रहीं थीं। खिड़की से जब वो नीचे झांकता तो सब कुछ हरा ही दिखता सिवाय एक चीज़ के वो थी उसकी मम्मी की आँखे। माना कि वो उन्हें देख नहीं पा रहा था लेकिन महसूस कर पा रहा था और सोच रहा था कि उसकी माँ की हालत क्या होगी उसका खत पाकर, गौरी तो खैर संभाल लेगी खुद को पर माँ….वो नहीं। अरे हाँ एक और भी तो है…? नहीं अब वो मेरी जिन्दगी में नहीं है … प्रणय ने एक अंगड़ाई ली और माही का ख्याल झट से सर से उतार फेंका।

प्रणय ने सोचा था कि एडी के पास जाकर पहले उसकी और क्रिस्टीन की बात करवाएगा फिर जितना टाइम बचेगा थोड़ा सैर कर लेगा और गोवा बीच तो जाएगा ही जाएगा। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, किस्मत ने उसे फिर ऐसे दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया कि उसे फिर खुद पर ही शक हुआ।क्रिस्टीन ने जो एड्रेस दिया था वहाँ पर कोई एडी नहीं रहता…. इतना सुनकर ही उसका सर घूम गया ,वो वहीं दरवाजे पर जाम हो गया , उसे हरा-भरा गोवा फिर से वीरान लगने लगा। उसे वो पागल नज़र आने लगा..मैं ऐसा कैसे कर सकता हूँ… उसके दिमाग में ये सवाल बिजली की तरह से तैर गया।

अब कहानी में आगे क्या होगा? क्या प्रणय फिर बीमार ही साबित होगा? अब इस दोराहे पर आकर वो कदम किधर बढाएगा घर जाएगा या कहीं खो जाएगा?ये कुछ सवाल जिनके जवाब बाद में ही दिये जाए तभी दिलचस्प रहेगा।

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