Love knows no gender….

दुनिया की सबसे pure feeling क्या है? प्रेम,प्यार ,इश्क़ , love… है ना! इसके बिना व्यक्ति अधूरा और दुनिया आधी सी लगती हैं। जब आप को प्यार होता है किसी से तो दिल कहता है It’s all right. कुछ भी गलत ही नहीं लगता प्यार में। क्योंकि , प्यार कभी गलत नहीं होता ये ऐसी भावना हैं जो सदियों से मासूम रही है सदियों तक मासूम रहेगी( बस शर्त इतनी है कि जिससे आप प्यार करते हो वो सही इंसान हो।)। कितनी खूबसूरत लगती है दुनिया जब आपका boyfriend घुटने पर बैठ कर आपसे शादी करने के लिए पूछता है ! हर लम्हा थाम लेने को जी करता है जब आपकी crush कहती हैं कि वो आपसे प्यार करती है। कितनी रंग-बिरंगी लगती है हर चीज़ जब एक लड़का अपने boyfriend से अपने प्यार का इजहार करते हुए कहता है चलो सारी जिन्दगी ऐसे ही बिताते है एक-दुसरे के साथ…।

क्या हुआ ये पढ़कर थोड़ा हैरान हो गए क्या आप लोग? हाँ सच में उन्हें भी खूबसूरत लगता है जब वो एक दूसरे के साथ होतें हैं …., दोनों बहुत सुरक्षित महसूस करतीं हैं जब एक-दूसरे की बाहों में होतीं हैं क्योंकि वो लोग भी प्यार करतें हैं। वो लोग कौन ? अरे वही वो लोग जिन्हें भारतीय समाज आज भी सिरे से स्वीकार नहीं कर पाया है , जिनके प्यार के किस्से पढ़कर आज भी हैरानी होती है ,जिन्हें हम इंसान समझने के लायक नहीं समझते, बीमार समझते है, जो समाज के डर से अपनी पहचान छिपा कर रखतें हैं। अरे वहीं वो लोग जिन्हें हम गे, किन्नर कहतें हैं। वही वो लोग जो LGBTQ ( lesbian,gay ,bisexual, transgender, Queer) समुदाय में आते हैं। तो अब तो आप समझ ही गए होंगे कि मैं किनकी बात कर रही हूँ।

इनके मुद्दे को उठाने का मकसद क्या है कुछ खास नहीं बस मैं भी इनके त्यौहार में शरीक होना चाहती हूँ । होली , दिवाली ईद जैसा ही त्यौहार LGBTQ समूह के लोगो का भी होता है जिसे जून में मनातें है पूरा जून माह ही प्राइड मंथ के नाम से मनाया जाता है। प्राइड यानि कि गौरव ..इन्हें गर्व है अपने गे (पुरुष +पुरुष) लेस्बियन (महिला+महिला) या bisexual होने पर। क्योंकि ये जानतें हैं कि प्यार सिर्फ प्यार है सही या गलत नहीं , और ये किसी से भी किसी भी शरीर में होकर किया जा सकता है क्योंकि प्यार शरीर नहीं देखता , उम्र नहीं देखता न ही लिंग देखता है । प्यार सिर्फ प्यार देखता है।

Homosexuality को आज हम भले ही पाप समझ रहें हैं लेकिन अगर इतिहास उठाकर देखें तो आपको पता चल जाएगा कि कभी इसे भी उतनी ही मान्यता प्राप्त थी जितनी कि एक पुरुष व एक स्त्री के सम्बन्ध को। उदाहरण के लिए आप खजुराहो को ही ले लीजिए । वहाँ कई ऐसी मूर्तियां प्राप्त हुई है जो इस बात की तस्दीक करती है कि समान लिंग की तरफ आकर्षित होना ये कुछ नया नहीं हज़ारों साल पुराना है । सिर्फ भारत ही नहीं विश्व में भी समलैंगिक सम्बन्धों के कई सारे सबूत मिले है। मेसोपोटामिया में समलैगिंक जोड़ो को देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता था। चीन के हन राजवंश में समलैंगिकता खूब प्रचलित थी, जापान में मीजी काल के पहले Homosexuality एक सामान्य बात थी जापानी लोग इसे नन्शोकू (पुरुषों का पुरुषों से प्यार) कहतें थें। अमेरिका,ग्रीस , थाईलैंड , अफ्रीका रोम आदि देशों में भी इस बात के सुबूत मिले है कि समलैंगिकता कोई आज का मसला नहीं है ये तब से है जब से दुनिया हैं।             (source- dainik bhasker). 

मुझे ये कहने में गर्व है कि अपना देश भी अब उन 28 देशों में है जो समान लिंग में प्रेम करने की इजाजत देता है। 2017 में SC की 5 सदस्यीय पीठ ने धारा 377 जोकि समलैंगिकता को अपराध मानती थी , को निरस्त कर दिया। यानी अब गे या लेस्बियन होना कोई अपराध नहीं रह गया है। लेकिन कानूनी आजादी से ज्यादा बदलाव नहीं आएगा बदलाव लाने के लिए सामाजिक व वैचारिक स्तर पर भी बदलाव आए तो कुछ बात भी बने । और विचार बदले इसके लिए तो ये जरुरी है कि सबसे पहले ये सोच बदली जाए कि ये लोग बीमार होतें हैं। क्योंकि न ये लोग बीमार होतें हैं और न ही ये जो करतें हैं वो इनके बस में होता है। जैसे कि जब आपकी Wife or gf आपके सामने होती हैं तो जो भावनाएं दिल में आतीं हैं वो आप ही आ जाती है कि आप जबरदस्ती वैसा सोचने लगतें हैं! या जब कोई लड़की किसी लड़के की तरह देखती है तो उसके मन में जो भाव आता हैं उसपर लड़की का कुछ अख्तियार है? नहीं है ना ! ठीक वैसे भी इनके साथ भी होता हैं। लेकिन इनका प्यार भी वैसा ही होता है जैसा कि आम इंसान का। बस फर्क इतना है कि नार्मल लोग खुलेआम अपने पार्टनर के साथ मिल सकते है बात कर सकते है शादी कर सकतें हैं क्योंकि समाज एक स्त्री और एक पुरुष के रिश्ते को स्वीकार करता है। 

लेकिन ये लोग खुलेआम नहीं मिल सकतें, शादी नहीं कर सकते समाज में अपनी पहचान छिपा कर रखतें हैं क्योंकि समाज एक पुरुष का दूसरे पुरुष के साथ , स्त्री का स्त्री के साथ सम्बन्ध नहीं स्वीकार करता, जो भी ऐसे सम्बन्धों में होतें है उन्हें समाज तो समाज उनका खुद का परिवार भी नहीं स्वीकारता। जो की ये दर्शाता है की लोग आज भी अपनी पुरातन सोच के ही गुलाम है, इन्हें नहीं फर्क पड़ता कि science क्या कहती है इन्हें फर्क पड़ता है कि बगल वाले शर्मा जी क्या कहते हैं।

हमें जरुरत है ऐसे लोगों की फिलिंग्स समझने की और उनकी पसंद की इज्ज़त करने की क्योंकि वो भी इंसान है और अपनी मर्जी से प्यार करने का हक़ उनको भी है। ये समाज के माथे पर कलंक नहीं चंद्रबिन्दी हैं। करन जौहर की न जाने की कितनी ही मूवीज देखते होंगे आप, और जब सब्यसाची की ड्रेस पहन कर मॉडल रैंप वाक करती हैं तब तो दिल ही थाम लेतें हैं आप।

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