‘Laal Diary ‘ A spooky horror story

 सान्या नींद से जगकर बिस्तर पर बैठे-बैठे आँखे मल रही थी बार-बार फोन की रिंग बजने की वजह से उठ तो गई थी लेकिन ऐसा लग रहा था कि वो नींद में ही हो। आज रात में देर से सोने की वजह से उसका सर अभी भी भारी लग रहा था उसपर से बार-बार विक्रांत के कॉल ने उसके सर में और दर्द पैदा कर दिया। उसने अपने बालों में दोनों हाथों को फंसा कर सर को आराम देने की कोशिश की लेकिन फिर से फोन घनघना उठा। वो कल रात के बाद से विक्रांत का फोन बिलकुल भी नहीं उठाना चाहती थी लेकिन जब 6वीं बार उसका फोन आया तो बेमन से उसने फोन रिसीव किया।                                        हाँ हेलो वीकू !बुआ क्या…? सान्या की सारी नींद पायल की आवाज सुनते ही गुम हो गई।                                                नहीं…नहीं… वो ठीक था, हाँ 1 बजे तक मेरे साथ था और पूरी तरह ठीक था …हाँ उसे कोई दिक्कत नहीं थी नहीं …. मैं आ रही हूँ , तुम रो मत ज्यादा कुछ नहीं है।                              हमने दीप्ति को भी इसी तरह खोया था… उधर से एक डूबी हुई आवाज़ आयी और फोन कट गया। सान्या ज़रा भी परेशान नहीं हुई पायल की आखिर बात पर भी नहीं बल्कि अपने मन को एक से बढ़ कर एक तर्क देने लगी क्योंकि उसे लगता है विश्वास और तर्क में, तर्क हमेशा भरोसेमंद साबित होते हैं तर्क मजबूत रहतें हैं लेकिन विश्वास कमज़ोर भी हो सकता हैं । तर्क साइंस से बनता है और विश्वास धारणाओं से।            ये लोग भी इतनी छोटी-छोटी बातों पर न जाने क्या-क्या सोच लेते हैं, दीप्ति की बात और थी पहले से ही कोरोना की वजह से उसकी तबियत खराब हो चुकी थी दूसरे हार्ट भी कमज़ोर था उसका वरना 25 की उम्र में कौन मरता है लेकिन इन लोग को लगता है चिकन पॉक्स जैसी बीमारी से उसकी मौत हो गई। सान्या ने वार्डरोब से अपने कपड़े निकाल के बाथरूम का रुख किया। 

शीशे के सामने खड़ी हो सान्या तैयार हो चुकी थी बस बालों को कसने का काम बाकी था उसने दोनों हाथों से बालों का जुड़ा बनाकर एक हाथ में पकड़ा और क्लिप्स के लिए टेबल का ड्रॉर खोला तो चौक के पीछे हट गई उसके बाल खुल के उसके कंधे पे आ गएँ और माथे पे कुछ पसीना भी छलक आया।                दादू जी की डायरी….? वो ड्रॉर के अंदर हाथ डाल के लाल रंग की एक डायरी निकालती हैं। चमडे़ के खोल में लिपटी लाल रंग की मोटी सी डायरी जिसपर कुछ प्राचीन समय के जानवरों के चित्र बनें थें और थोड़ी सी जलती आग भी बनी थी। काफी वक्त हो जाने की वजह से वो हलकी काली जान पड़ती थी धूल खायी हुई लेकिन फिर भी देखने में इतनी खूबसूरत की जो एक बार देख ले इसे हाथ में लिए बिना ना माने। सान्या ने डायरी के चारों तरफ उंगलियां घूमा कर देखा कहीं भी जलने का कोई निशान नहीं था ।   

  उसके दिमाग में तुरंत ख्याल आया कि जब ये जली नहीं तो विक्रांत ने रात को गार्डन में क्या जलाया था फिर..? हो सकता है कि उसने कोई दूसरी किताब जला दी हो इसके धोखे में ? सान्या का दिमाग फिर तर्कों की तरफ भागने लगा। “और नहीं तो क्या अगर इसे जलाया होता तो ये यहाँ थोड़ी होती । लेकिन जब उसने मेरे हाथों से किताब छीनी थी तो यही थी मैंने इसे ही पकड़ा था …? नहीं इसे पकड़ा होता तो ये ड्रॉर में थोड़े पड़ी होती! अँधेरे की वजह से मैंने उससे कोई दूसरी किताब बचाने की कोशिश की थी और उसने बिना देखें मुझसे छीन कर उसी किताब को जलाया था।                                                 थैंक गॉड कि दादू जी की ये निशानी सेफ है।सान्या ने उस डायरी को दोनों बाहों में कस के सीने से लगा लिया।                 कल रात में इसी डायरी के लिए विक्रांत और सान्या में झगड़ा हुआ था। रात में करीब 11 बजे के आसपास आकर विक्रांत ने उससे ये डायरी मांगी थी।पता नहीं क्या-क्या बोले जा रहा था कि इस डायरी ने दीप्ति की जान , निकित को बीमार बनाया मैं इसे फाड़ दूँगा या जला दूँगा। उसने सान्या को कमरे में बंद करके किचन से केरोसिन तेल लेकर बाहर गार्डन में इसे जला दिया था शायद । वो खिड़की से खड़ी-खड़ी इसे जलती देखती रही थी। बाद मे कमरे को खोलते हुए वो बोला था ,“इंसानी चमड़े में लिपटी कागज की लाश का मैंने अंतिम संस्कार कर दिया है।” वैसे तो दीप्ति ने भी जब पहली बार डायरी हाथ में ली थी तभी उसने बोल दिया था कि ये खोल कचरे से या पेड़ की छाल से नहीं बना हैं बल्कि किसी जानवर की खाल से बना है और अपने मरने से पहले दीप्ति ने यही बोला था कि ये कवर जानवर की खाल से नहीं बल्कि इंसान की चमड़ी से बनाया गया है। दीप्ति आर्कियोलॉजिस्ट थी इन सब पुरानी चीजों को काफी अच्छे से पहचानती थी लेकिन सान्या इस बात पर बिलकुल सहमत नहीं हुई , हाँ लेकिन जानवरों की खाल हो सकती है इस बात को स्वीकार किया था ये तर्क देतें हुए की उसके परदादा अंग्रेजी फ़ौज में थें और उस वक्त जानवरों का शिकार करना बिलकुल सामान्य बात थी लेकिन इंसानो की खाल छीलकर उसका कोई सामान बनाना या किसी किताब पे चढ़ाना ये सिर्फ एक बर्बरता हैं और उसके परदादा ऐसी बर्बरता कभी नहीं कर सकते । सान्या डायरी लिए बैठी ये सब कुछ सोच ही रही थी तभी फिर से विक्रांत का फोन आया और फिर से रोती हुई पायल की आवाज सुनाई दी।  थोड़ी सी सच्चाई

Don’t panic yaar, वहाँ पे सब है ना विकू के पापा-मम्मा तो क्यों परेशान हो रही हो? trust me उसे कुछ नहीं होगा । अंकल जी के घर का पानी ही खराब है तभी दीप्ति को भी चिकन पॉक्स हो गएँ थें और अभी वीकू को भी हो गए लेकिन उसे कुछ नहीं होगा क्योंकि उसका इम्युन सिस्टम मजबूत हैं उसे दीप्ति की तरह कोई बीमारी भी नहीं। समझी ना अब रोना बंद करो और अंकल-आंटी को सम्भालो वरना कहेंगे कि हमारी होने वाली बहु तो फ़िक्र ही नहीं करती हमारी। बाकी मैं आ रही हूँ। पायल को समझाने के बाद उसने फोन रख दिया और डायरी को अपनी गोद से हटाकर किताबों की रैक में अच्छे से लगा दिया।                                                                        उसने ज़रा भी इंटरलिंक नहीं किया की डायरी को पढ़ने के बाद ही दीप्ति की तबियत बिगड़ी थी , वो भी इसी तरह सान्या से डायरी वापस वहीं रख देने को कह रही थी जहाँ उसे मिली थी या उसको नष्ट कर देने को कह रही थी।लेकिन सान्या ने ऐसा बिलकुल नहीं किया था उसे किताबें पढ़ने या पुरानी चीजें रखने का कोई शौक नहीं है लेकिन ये डायरी उसके परदादा की एकलौती निशानी थी इसीलिए सान्या ने उसे संभाल के रख लिया था। इसे घर ले जाने के बाद ही निकित की भी तबियत खराब हुई थी उसी दिन वो इस डायरी को सान्या को वापस कर गया था। अभी विक्रांत…..

अरे छोड़ो यार !सान्या ने अपने दिमाग में तर्कों का इतना जमावाड़ा लगा रखा है कि वहाँ विश्वास या अन्धविश्वास ज़रा देर भी नहीं टिकता। सभी जानते है कि दीप्ति-वीकू जुड़वाँ हैं तो किसी को एक दिक्कत हुई वहीं दूसरे को वो गई तो घबराने की बात नहीं है। फिर वो हॉस्पिटल में हैं डॉक्टर्स है उसके पास और दीप्ति के केस की सारी फाइल्स भी। सारी overthinking को सर से झटक कर सान्या ने अपना हेलमेट उठा लिया और दरवाजे पर ताला लगा दिया।                                         ताला …..? हाँ ताला ही क्योंकि इतने बड़े से घर में वो सिर्फ अकेली रहती हैं उसकी एक बुआ और दादी हैं जो गांव में रहतीं हैं और एक छोटी बहन है जो अमेरिका के एक नामी स्कूल में स्कॉलरशिप पाकर पढ़ने गई हैं । जब छुट्टियां मिलती हैं तो आती है महीने भर के लिए साल में एक बार। एक साल पहले ही पापा की मौत हो गई थी उन्हीं की बरसी के लिए महीने भर पहले जब सान्या ने पूरे घर की साफ-सफाई की थी तब उसे पापा के पुराने बक्से में उसके परदादा के नाम की ये लाल डायरी मिली थी। माँ हैं उसकी लेकिन कहाँ हैं? इसका जवाब वो आज भी तलाशती हैं कुछ लोग कहते हैं कि वो घर से भाग गई थीं, कुछ कहते हैं कि वो पागल हो गई थी पागलखाने में बंद होगी वहीं कुछ लोग कहते हैं वो साध्वी बन गयीं हैं । क्या करें जितने मुँह उतनी बातें फिर हो भी तो 24 साल से ज्यादा हैं कौन ध्यान दे। इसीलिए वो लोगों की नहीं सुनती उसके पापा ने कभी उनकी माँ के बारे में नहीं बताया हैं बस इतना ही सच मानती हैं वो।   तो वो कौन थी?                                                        सान्या की बाइक हवा से बातें कर रही थी क्योंकि उसे जल्द ही हॉस्पिटल पहुँचना था वरना पायल रो-रो कर अपना हाल बुरा कर लेगी । वैसे वहाँ विक्रांत के और भी दोस्त हैं लेकिन वो सबसे ज्यादा क्लोज सान्या के ही है। 3 महीने पहले जब उसकी और विक्रांत की सगाई हुई थी तब सबसे ज्यादा डर उसे सान्या से ही लगता था लेकिन आज…आज सबसे ज्यादा भरोसा उसी पर है पायल को । अब तक दोनों की शादी हो चुकी होती लेकिन पिछले महीने दीप्ति की…..

सान्या ने बाइक सीधा हॉस्पिटल की पार्किंग में ही रोकी आकर इतने रास्ते में उसने कहीं ब्रेक भी नहीं लगाया था बाइक में । अपना हेलमेट बाइक पे रख के सान्या हॉस्पिटल के अंदर चल दी।

Wait for part-2 

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