‘Laal Diary ‘ A spooky horror story part- 2

 सान्या ने दुलार से फटकार लगाते हुए पायल को चुप कराया। अरे ऐसे थोड़े करतें हैं पागल,कितनी छोटी हिम्मत की है तू मुझे तो समझ नहीं आता कि वीकू को तुझमें ऐसा क्या दिख गया जो तेरे पीछे पागल हो गया उसे हमेशा से ही बहादुर लड़कियां पसंद रही हैं और तू हैं एक नंबर की डरपोक लड़की। पायल जब शांत हो गई तो उसे सान्या ने मुँह धुलने के लिए वॉशरूम भेज दिया। इसी तरफ थोड़ा समझा के,फटकार लगा के वो विक्रांत के मम्मी-डैडी को भी चुप कराना चाहती थी लेकिन उनकी आँखों में डर के जो लाल डोरे तैर रहें थें उन्हें साफ करने की हिम्मत सान्या में नहीं थी। उन्होंने अभी एक महीने पहले ही अपनी एकलौती लड़की को खोया हैं और अभी यही हाल उनके लड़के का भी है ऐसे में उन्हें समझाना और भगवान पर यकीन दिलाना ऐसा लगता हैं कि हम किसी पागल को गणित की समीकरण सॉल्व करने को बोल रहें हैं ।                                         

 विक्रांत के डैड उसकी माँ को बार-बार प्यार से पुचकार रहें थें और वो उनके कंधे पर सर रख के वीकू के बारे में पूछ रही थीं । दानिश सान्या का हाथ पकड़ के वहाँ से हटाकर अलग कोने में ले गया।” कल वीकू तुम्हारे साथ था ?”.                                 

 ये सभी को पता है,लेकिन तब तक वो ठीक था पूरी तरह। अंकल बोलते हैं घर पे ठीक था , तू बोलती है तेरे साथ ठीक था तो आखिर किस पॉइंट पर कहाँ तबियत खराब हुई उसकी।  मुझे खुद नहीं पता यार और फिर ऐसी बीमारियां एकदम से नहीं आती धीरे-धीरे शरीर में बनती हैं,पहले उसने ध्यान नहीं दिया तभी अचानक तबियत खराब हुई है।                                 

मैंने अंकल से पूछा है उसे कोई सिम्टम्स नहीं था चिकन पॉक्स का बिल्कुल ठीक था उसकी तबियत रात 2 बजे खराब हुई हैं और सेम वैसे ही जैसे दीप्ति की खराब हुई थी।                   

वहीं तो मैं बोल रही हूँ दोनों जुड़वाँ हैं तो दोनों को एक जैसी बीमारी होना कोई हैरानी की बात नहीं।                                  वाह ! दोनों का बीमार होना , दोनों का मरना तुम्हें हैरानी नहीं लगती।                                                                        क्या बकवास बोलते हो ? सान्या को गुस्सा आ गया।               

 वहीं जो उसने मुझसे कहाँ रात को कॉल करके उसने ही मुझसे कहा था कि अब उसे कोई नहीं बचा सकता,लाल डायरी ने अपना काम कर दिया है और कुछ और भी कहना चाहता था कि सान्या से कहना कि वो डायरी…. इसके आगे मुझे एक शब्द नहीं सुनाई दिया मैं लोकेशन ट्रेस करके उस तक पहुँचा तो मुझे वो सड़क पर पड़ा मिला अपनी बाइक से काफी दूर हांफता हुआ उसके शरीर पर अजीब से दाने निकल आएं थें,बुखार से उसका शरीर आग बन चुका था। 

मैं उसे तुरंत हॉस्पिटल ले के भागा लेकिन फिर भी वो तुम्हारा नाम बोलता रहा। क्यों ? क्यों कर रहा हैं ऐसा वो ? इतने सब है तुम्हारा ही नाम क्यों लेता है बार-बार वो? दानिश गुस्से और शक में सान्या पर चिल्लाता ही जा रहा था। वो अपने कण्ट्रोल से बाहर लग रहा था ऐसा हो भी क्यों ना जिसके बचपन का सबसे अजीज दोस्त इस हाल में होगा तो वो और करेगा भी क्या। उधर डॉक्टर कोई जवाब नहीं दे पा रहें थें और इधर सान्या भी खामोश खड़ी हो गई थी। बोलो …! दानिश चीख के बोला । इसमें मैं क्या बोलूँ जब उसका ही दिमाग काम नहीं कर रहा था तो उसके ही दिमाग में एक किताब के लिए इतना डर बैठ गया तो। मैंने तो नहीं कहा था कि मेरे घर आकर मुझसे झगड़ा करो और फिर मेरा नाम लो । इसमें मैं क्या कर सकती हूँ ?                ज्यादा बनो मत वरना …? दानिश ने सान्या का गला पकड़ने की कोशिश की लेकिन तब तक बीच में उर्वी और कबीर आ गएँ । stop it guys, ये क्या पागलपन है हॉस्पिटल हैं ये कोई तबेला नहीं हम सब वैसे ही विकी के लिए परेशान हैं और तुम लोग यहाँ भी अपना तमाशा शुरू कर रहे हो। कबीर ने दानिश को दूर किया और उर्वी ने सान्या को संभाला।                        तुम लोगों को लगता है मैं चीख रहा हूँ?नहीं मैं सिर्फ ये कह रहा हूँ कि अगर विक्रांत को कुछ हुआ तो इसकी जिम्मेदार सिर्फ ये होगी और मैं इसके लिए इसको सजा भी दिलाऊंगा।              ये क्या उल्टा-सीधा बोले जा रहे हो तुम ? उर्वी भड़क गई। अच्छा मैं उल्टा-सीधा बोल रहा हूँ लेकिन तुम लोग क्या उल्टा-सीधा देख भी रहें हो ? जब से तुम सब उससे मिले हो वो बार-बार सान्या का नाम लेकर ही क्या इशारा कर रहा है बोलो।     हम सब उससे मिल चुके है और सान्या अभी तक नहीं मिली हैं तो शायद मिलने के लिए बोल रहा हो उससे। कबीर ने दानिश को समझाने की कोशिश की।                                                हे भगवान,तुम लोग इतना ही नहीं सोच पा रहें हो कि अचानक किसी की तबियत कैसे खराब हो सकती है ? जरूर उसे कुछ उल्टा-सीधा ही खिलाया गया होगा और फिर तबियत भी तो उसकी सान्या के घर से निकलने ……                                    just shut up दानिश अब एक शब्द नहीं एक भी शब्द नहीं समझे ! कबीर दानिश की बात पे हाइपर हो गया था।                सान्या तू इसकी बातों पर ध्यान ना दे हमें पता है ये हर वक्त तुझे गिराने की कोशिश करता रहता है तू चल वीकू से मिल ले चलके। उर्वी ने उसके दोनों कंधो को प्यार से दबाते हुए कहा। same on you, कहके कबीर भी दानिश के सामने से हट गया। किसी ने दानिश की बात को सीरियस नहीं लिया क्योंकि उसकी और सान्या की लड़ाई जग जाहिर थी। दानिश और विक्रांत का घर पास-पास ही था दोनों साथ बड़े हुए और दोनों ने पढ़ाई की शुरुआत भी साथ में ही की थी। सबसे खास दोस्त विक्रांत का दानिश ही था लेकिन highschool में जो दूसरी दोस्त उसकी बनी वो सान्या ही थी पहले दानिश भी उससे प्यार से ही बात करता था।लेकिन धीरे-धीरे उसने महसूस करना शुरू किया कि विक्रांत का झुकाव अब उसकी तरफ नहीं बल्कि सान्या की तरफ हो गया था और कॉलेज तक वो विक्रांत की बेस्टफ्रेंड बन गई थी दानिश से भी खास। जो उसे कतई रास नहीं आया एक वक्त को प्यार में धोखा खाया हुआ इंसान संभल भी सकता है लेकिन जब दोस्ती में धोखा मिलता हैं तो आदमी एकदम टूट जाता हैं । यही दानिश के साथ भी हुआ तो उसके और सान्या में झगडे बढ़ते गएँ,शुरू शुरू में सारे दोस्त इसे मजाक ही समझते थे लेकिन बाद में सभी ने उन दोनों के झगडे को इग्नोर करना शुरू कर दिया था। आज इन दोनों के रिश्ते की सारी कड़वाहट खुलकर सामने आ गई और सान्या को पहली बार पता चला की दानिश उसकी हद तक नफ़रत करता है । 

विक्रांत को देख के सान्या ने अपनी चीख को बड़ी मुश्किल से काबू किया। उसके चेहरे से लेकर पैर के तलवों तक में लाल-गुलाबी रंग के बड़े-बड़े दाने निकल आएं थें ऐसा लग रहा था कि किसी ने विक्रांत को पकड़ के उसके शरीर में नोच-नोच के ये दाने उगाये हैं । विक्रांत की हालत पर सान्या की आँखों में आंसू आ गएँ । लेकिन विक्रांत उसे देखकर मुस्कुरा पड़ा और ऊँगली के इशारे से उसे अपने पास बुलाया। दर्द बेतहाशा हो रहा था उसके बदन में जिससे वो साफ शब्दों में बोल भी नहीं पा रहा था इसके बावजूद वो कुछ बोलने की कोशिश कर रहा था और अपना एक हाथ उसके आगे फैला दिया। उसके पके हाथ को छूते भी डर लगे लेकिन फिर भी सान्या ने उनकी हथेली पर अपना हाथ रख दिया। दानिश खिडकी से सब देख रहा था।                                              ये कैसे हुआ वीकू? सान्या की सिसकी बंध गई। सान्या के इतना पूछते ही विक्रांत के चेहरे पर पसीना आने लगा और उनमे बहुत तेज खुजली और दर्द होने लगा वो कराह उठा लेकिन उसने फिर भी बोलने की कोशिश की ,” वो डायरी…ड..ला…ल डायरी… उस..में…एक… वो …उसे जलाना…य…फा… आ..माँ…मम्मी. ..कह के विक्रांत रोने लगा उसके आंसू दानों पर पहुँचे तो उसमें और सूजन बढ़ गई और दर्द से विक्रांत बेहोश हो गया। आनन-फानन में सान्या को बाहर निकाल कर डॉक्टर्स ने फिर से ट्रीटमेंट देना शुरू किया। दीप्ति की हालत खराब थी लेकिन इतनी ज्यादा नहीं जितनी विक्रांत की।                                                   वो लाल डायरी क्या है? कहाँ हैं? ICU के बाहर आते ही दानिश ने सान्या को रोक लिया।                                               उसका तुम क्या करोगे भाई वो तुम्हारे काम की नहीं ! सान्या टूटी और रूंधी आवाज में बस इतना ही बोल पायी क्योंकि अभी वो उससे कहीं ज्यादा डर चुकी थी जितना की पायल या वीकू के माँ-बाप ।                                                                  उस डायरी में तुम्हारा कोई राज छुपा हैं न जो विकी जान गया था। क्या पता यार , वो ना मैंने लिखी है और न अभी तक पढ़ी हैं। तो चलो फिर दो मुझे वो डायरी मैं देखता हूँ कि उसमें ऐसा क्या है और अगर एक भी सुबूत मिला ना तुम्हारे खिलाफ तो चाहे मुझे खुद को ही बेचना पड़े लेकिन तुम्हें सलाख़ों के पीछे पहुँचा के रहूंगा।        

सान्या अपने कमरे में पहुँच भी नहीं पायी थी उससे पहले ही दानिश ने उसके बिस्तर से लेकर अलमारियों को बिखेर दिया था। वो और उर्वी जब कमरे में पहुँची तब उन्होंने देखा कि दानिश हर चीज़ इधर-उधर फेंक रहा है और कबीर उसे बार-बार ऐसा करने से मना कर रहा है । अचानक ही दानिश की नज़र करीने से सजाये किताबों की रैक पर पड़ी जिसमें लाल डायरी सबसे आगे रखी थी। ये देखकर सान्या को थोड़ी हैरानी हुई क्योंकि उसने सुबह ही डायरी को किताबों के बीच में अच्छे से छिपा कर रखा था तो ये सबसे आगे कैसे आ गई? हो सकता है जल्दी-जल्दी में मैं इसे सही जगह पे रखना ही भूल गई और आगे ही लगा दिया हो ।                    तो ये है वो लाल डायरी है ना ? जिसके लिए तुमने …. दानिश कुछ कहने जा रहा था लेकिन जैसे ही उसकी नज़र कबीर की लाल आँखों पर पड़ी उसने वाक्य वहीं खत्म कर दिया। डायरी को दोनों तरफ घूमाने के बाद दानिश ने उसका पहला पेज खोला ही था तभी उसकी जेब में पड़ा फोन घनघना उठा। फोन रिसीव किया तो पता चला विक्रांत की तबियत बहुत क्रिटिकल हो गई है । तभी सान्या का फोन भी बज उठा। सारे दोस्त कमरे को उसी हाल में छोड़ कर हॉस्पिटल के लिए भागें लेकिन दानिश वो डायरी भी साथ ले जाना बिलकुल नहीं भूला ।    

Wait for next part .

Thanks for readings 🙏.

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