“दारोगाजी”- मुंशी प्रेमचंद की कहानी ।

 कल शाम को एक जरूरत से तांगे पर बैठा हुआ जा रहा था कि रास्ते में एक और महाशय तांगे पर आ बैठे। तांगेवाला उन्हें बैठाना न चाहता था, पर इनकार भी न कर सकता था। पुलिस के आदमी से झगड़ा कौन मोल ले। यह साहब किसी थाने के दारोगा थे। एक मुकदमे की पैरवी … Read more

“प्रेरणा” प्रेमचंद की कहानी

 प्रेरणा प्रेमचंद की कहानी    मेरी कक्षा में सूर्यप्रकाश से ज्यादा ऊधमी कोई लड़का न था, बल्कि यो कहो कि अध्यापन-काल के दस वर्षों में मेरा ऐसी विषम प्रकृति के शिष्य से सामना न पड़ा था। कपट-क्रीड़ा में उसकी जान बसती थी । अध्यापकों को बनाने और चिढ़ाने, परिश्रमी बालकों को छेड़ने और रुलाने में … Read more