इश्क़, मोहब्बत, प्यार की बातें और….. फरवरी।

हर तरफ शोर है तेरे आने का!                                          आशिकों ने ए फरवरी! तुझे भी मशहूर कर दिया।

फरवरी के इस रुमानी महीने में अगर आप लोगों से मैं ये पूछूं कि कैसे हाल है आप सब के , तो कायदे से जो कमिटेड होंगे उनके लिए तो …गर फिरदौस-ए -जमीं अस्तो ….. टाइप होगा,लेकिन जो सिंगल है उनके लिए तो ये सवाल पूछने वाला ही सबसे बड़ा दुश्मन है, आखिर इस प्रेम भरे माह में किसी प्रेमी/प्रेयसी का ना होना किसी भी नवयुवक/नवयुवती के कितना कष्टदायक होगा? कपल इस बात कि शायद कल्पना भी ना कर पाये…

जिसके पास कोई पार्टनर नहीं है उसकी तो कोई बात नहीं, लेकिन जिनके पास पार्टनर हैं वो कैसे समझते हैं फरवरी वाले प्रेम को…..?

फरवरी वाला प्रेम? अरे भई प्रेम तो प्रेम होता है फिर चाहे फ़रवरी का हो या दिसंबर का..! इस मत से तो मैं भी सहमत हूँ लेकिन जो प्यार का इजहार है इस शान्त मौसम में आसानी से किया जा सकता है क्योकि आसपास की हर चीज़ की तरह मनुष्य का मन भी इस ऋतु में हरा-भरा आनंदित रहता है , इस महीने में साल के अन्य महीनों की अपेक्षा अधिक स्थिरता , चंचलता, कामुकता,और सहजता रहती है। psychology के अनुसार , मनुष्य के मस्तिष्क पर आसपास की वस्तुओ का अधिक असर रहता है इसीलिए शायद इस महीने में मन भी बसंती हो जाता है, और प्रेम करना या प्रेम का प्रगटीकरण करना अन्य माह की अपेक्षा इस माह में आसान रहता हैं।

लेकिन क्या प्रेम का प्रगटीकरण कर देने भर से आप ये कह सकते है की आप प्यार में है? देखिए इजहार आप चाहे जिस महिनें में करें लेकिन अगर उसमें प्यार नहीं कोई और भावना है तो सब बेकार है । बिना प्रेम की भावना जाग्रत हुए आप सिर्फ आकर्षित हो किसी के समक्ष खुद को समर्पित करते है या किसी से समर्पण की अपेक्षा रखते हैं तो ऐसा करके ना सिर्फ आप प्रेम की अपितु स्वयं की वैल्यू भी कम कर रहें होते हैं।    

सीने से आँचल गिरा, बदनियती भले ही हवा ने दिखाई थी मोहब्बत का मान बढ़ा गई वो नज़र जो झट से आशिक ने झुकाई थी।                                 -awa

यकिनन अगर आपका प्रेम भी उपरोक्त आशिक वाला ही है तो मैं कहूँगी बहुत खुशनसीब हैं वो जो आपकी प्रेयसी हैं या जिन्हें आप प्यार करतें हैं।

क्योंकि आजकल ऐसा प्यार Red data book में सम्मिलित हो चुका है , मेरा मतलब कि अत्यंत दुर्लभ हो चुका है। आजकल के इश्क में तो सबकुछ हो जाता है और सब होने के बाद पता चलता है कि बस “प्यार ही नहीं हुआ हम दोनों में”। अगर आपको भी लगता है कि आप प्यार में है तो इजहार करने से पहले गौर कर लीजियेगा अपने प्यार पर कि कहीं ये भी तो वैसा नहीं है जैसा मैंने बताया , कहीं प्यार के नाम पर आप सिर्फ अपनी शारीरिक आवश्यकता तो नहीं पूरी कर रहे । अगर ऐसा है तो भई सामने वाले से ये मत कहना कि “मैं प्यार करता हूँ तुमसे” सीधा अपना मोटिव ही बता देना, इससे ये होगा की लोगों का प्यार पर भरोसा बना रहेगा,और अगर ऐसा नहीं है तो सीना तान के घूमिये, “मुस्कुराईये क्योंकि आप प्यार में हैं।” और फिर उस प्यार का इजहार आप फरवरी में किजिये या खड़े जून में प्यार ,प्यार ही रहेगा।

तो इजहार से पहले आप भी देख लीजियेगा की जो आपके पास खुद को समर्पित करने आया है वो सिर्फ समर्पण ही चाहता है या उसका निहितार्थ कुछ और ही है … यूँ कर ना कीजियेगा कि फरवरी के इस खुमार में आप सामने वालें/वाली की आंखों में इज्ज़त, और हिफाजत देख ही ना पाये।

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