एक वादा खुद से, खुद के लिए।

मैं आप ही अपनी प्रेमिका मैं आप ही अपनी सहेली।                 और नहीं कोई मेरे जैसा बस मैं एक अकेली।                

वेलेंटाइन वीक अपनी मध्यावस्था में पहुँच चुका हैं अब बस कुछ ही दिन शेष रह गए हैं वो भी मैं उम्मीद करती हूँ कि आप अच्छे से सेलिब्रेट करेंगे। अपने प्रिय को और ज्यादा खुश रखने और प्यार करने के चक्कर में इन दिनों आप नित नए-नए प्रयास कर रहें होंगे, उनकी पसंद के कपड़े पहने जा रहें होंगे ,उनके लिए खाना बनाया जा रहा होगा और भी जाने क्या-क्या नहीं किया जा रहा होगा लेकिन …अपने लिए ? जी हाँ आप अपने लिए क्या-क्या कर रहें हैं? क्योंकि मुझे ये लगता है कि खुद के साथ जितना वक्त हम खुद बिताते हैं उतना कोई और नहीं ,जितना हम स्वयं को जानते है कोई और नहीं, तो खुद का ख्याल भी तो हमें किसी और से ज्यादा रखना चाहिए  “क्योंकि हम सबसे अलग और सबसे खास हैं” तो इस प्रॉमिस डे(11 febuary) हमें खुद से भी तो कुछ वादें करने चाहिए है ना।

कभी खुद पर फिदा होके देखा है कभी…? बस मैं इतनी सी ही बात पूछ्ना चाहती हूँ आपसे , कितना मामूली सा सवाल है ये तो! हाँ है तो मामूली सा ही लेकिन इसके अर्थ मामूली कतई नहीं हैं। मेरे मनोविज्ञान के सर हम सभी बच्चों से ये सवाल अक्सर कई प्रकार से पूछा करतें हैं वो कहतें हैं ” जितना ज्यादा जरुरी दूसरों को जानना हैं उससे कहीं ज्यादा जरुरी खुद को जानना हैं और जब तक आप खुद को नहीं जानते तब तक ये कहना बेकार है कि आप दूसरों अच्छी तरह जान गए।”

खुद को अच्छी तरह जानने के लिए हमें खुद को वक़्त देना पड़ता है, और आजकल की इतनी hard life में सोने को मिल जाए यही बहुत है जैसा चल रहा है। 

सुबह उठे काम वाले काम पे निकल गए, पढ़ाई वाले स्कूल/कॉलेज ,औरतें घर के कामों में उलझ गईं , बुजुर्ग पुरानी यादों में । इन सब को इन चीजों से जो वक़्त मिला वो चला जाता है सोशल मीडिया पर और खुद के लिए कुछ बचता ही नहीं। मतलब ये की वर्तमान समय में दूसरी दुनिया में जाकर जीना तक आसान नहीं गया है लेकिन खुद के लिए वक्त बचाना पहाड़ खोदने जितना मुश्किल। 

                                                                                  मुझे समझ नहीं आता की आखिर जो काम आसान है उसे हमने इतना मुश्किल क्यूँ बना दिया? खुद को बस एक घंटे देना क्या इतना मुश्किल होना चाहिए ? इतना वक्त तो हम सारे दिन में यूँ ही बर्बाद कर देतें हैं बिना कुछ किये , तो क्या वही वक्त हम खुद को नहीं दे सकते? अरे भाई खुद को वक्त देना, खुद को जानना, प्यार करना उससे कहीं ज्यादा जरुरी हैं जितना दूसरों को करने से , जब तक आप खुद को प्यार नहीं करेंगे तब तक दूसरे से ये उम्मीद करना की वो आपको बेइंतहा मोहब्बत करेगा उचित नहीं है ना यार!

तो आइए इस प्रॉमिस डे हम खुद से कुछ वादें करतें हैं ताकि स्वयं को जानना हमारे लिए आसान हो जाए……

  • ‌ चाहे कितना भी मुश्किल दिन क्यों न हो मैं खुद के लिए 1 घंटे का वक्त जरूर बचा कर रखूँगा/रखूंगी।
  • ‌दुसरे की तारीफों के लिए खुद को नहीं बदलूंगा / बदलूंगी
  • ‌ दूसरों के दबाव में आकर अपने फैसले नहीं तय करूँगा / करुँगी ।
  • ‌मै किसी दूसरे के लिए खुद को तकलीफ नहीं दूँगा / दूंगी
  • ‌मै खुद से हमेशा प्यार करता / करती रहूँगा / रहूंगी परिस्थितियां चाहे कितनी ही विषम क्यों ना आ जाए । 

बस ये चन्द वादें कर लीजिये आप खुद से फिर देखिये आप अपना व्यक्तित्व … बिलकुल चुम्बकीय हो जाएगा। आपको जानने वाले भी आपके प्यार में पड़ जाएँगे आपसे मिलने वाले भी और आपको स्वयं से भी मोहब्बत बढ़ती ही जाएगी । 

Moral of the story that आप स्वार्थी बनिए थोड़ा सा, अपने लिए सोचना शुरू कर दीजिये। 

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