Sexual harassment के लिए सबसे ज्यादा परिवार जिम्मेदार होता है।

डर से , घबराहट से , चिंता और आत्मग्लानि से भर जाती है, मासूम-सी वो लड़की जिस्म पे भूखी नज़रों का बोझ लिए घर जाती है।     –Awa

अच्छा दोस्तों ये बताइये की कितने open minded हैं आप लोग? जाहिरा तौर पर आप में से अधिक इस सवाल को दिल पर ले लेंगे और सुबूत के साथ अपने स्वतत्रं विचारों का प्रचार करेंगे और सुबूत देतें हुए कहेंगे हम अपनी बच्ची को अकेले आने जाने देतें हैं, मैं कभी अपनी बेटी को रात में पार्टी करने से नहीं रोकता , मेरी भतीजी लिव-इन-रिलेशन में हैं और हमें कोई एतराज नहीं आदि । इस तरह के कई सारे और उदाहरण भी देंगे आप लोग लेकिन मैं कहूँगी कि ये “खुले विचार नहीं, बल्कि बदलते वक़्त की बयार है।”क्योंकि अगर आप लोग सच में खुले विचारों के होते तो भारत जैसे देश में Sexual harassment पर लड़की की गलती मानने वाले का इतना बड़ा कारवां नहीं लगा होता । आप में से कई ऐसे पाठक हैं जो आज भी इस घटना पर यही सोचते हैं कि “पहले गलती लड़की से ही हुई होगी वरना लड़के में इतनी हिम्मत कैसे आती?” इसी सोच के कारण ही कई लडकियां बस में , स्कूल में कॉलेज में , बाजार में, दुकान पर , सफर में , दफ़्तर में , सड़क पर , गली में , ….यहाँ तक की घर में भी यौन शोषण का शिकार होती हैं पर कैरेक्टर उनका ही गिरा समझा जाएगा, घर वाले उनपे ही पाबन्दियां लगाएंगे , ये सोच के किसी से नहीं बताती।     

    

 

  मैं एक उदाहरण से अपनी  बात कहना चाहुंगी । मेरी एक खास दोस्त रोमी अभी होली  में अपने घर जा रही थी वो जिस बस् से सफर कर रही थी उसी मे उसकी  सीट के बगल मेंं एक लड़का भी बैैैैठा था जो बार-बार् उसे हाथ लगा रहा था और जब वो अपने गााँव में उतरने वाली  थी तब उस लड़के ने उसे  अपना न.भी देने की कोशिश की थी। जब उसने मुझे ये बताया तो मैनेे कहा कि तुम्हे घर पे बता देना चाहिए तो उसने कहा “ नहीं फिर भैया कॉलेज नहीं जाने देंगे।”बेवजह बात का isseu क्यूँ बनाना यार ! मैं हैरान थी कि वो दबंग लड़की अपने घर वालों से डरती है इसीलिए उसने उस लड़के से कुछ नहीं कहा उसे डर था कि अगर बात आगे बढ़ गई तो उसके घर वालों को पता चल जाए! 


 लेकिन एक और तथ्य यह भी है कि कई बार लड़कियों का यौन उत्पीड़न हो रहा होता है और उनको पता भी नहीं चलता क्योंकि sexual harassment physically होता है तो उन्हें पता चल जाता है शाब्दिक में भी लेकिन सड़क पर चलते समय जब उनका दृश्यिक उत्पीड़न होता हैं तो वे अज्ञात रह जाती है कभी-कभी।  

हर लड़की कभी न कभी Sexual harassment का शिकार हुई होती हैं-

National sexual violence resource centre के अनुसार,देश में 81% महिलाएं sexually harras होतीं हैं। लेकिन मुझे लगता है कि ये आंकड़ा और ज्यादा होता अगर देश कि हर महिला ने इसमें भाग लिया होता , क्योंकि मैं अगर अपने हिसाब से बताऊँ जितना अभी तक मैंने रिसर्च की है मैंने पाया है कि इंडिया की हर लड़की किसी ना किसी रूप में harras हुई हैं । मैंने अपनी क्लास में भी ऐसे उदाहरण देखें हैं जिन्होंने ये स्वीकारा की वे भी एक अनचाही छुअन का चुभन का शिकार हुई हैं। खुद मैं भी sexual harassment का शिकार हुई हूँ । अगर कोई लड़की यह कहती है कि नहीं उसके साथ कभी कुछ भी बुरा नहीं हुआ , किसी ने उसे कुछ नहीं कहा तो मैं कहूँगी कि वो आपसे झूठ बोल रही है।

झूठ इस लिए क्योंकि इस हरकत से वो पहले स्वयं में ही खुद को अपराधी करार दे देगी फिर बाद में दुनिया के ताने उसके माथे पर “बुरी लड़की ” होने का लेबल चिपका देंगे। इसलिये वो ये बात सबके सामने नहीं रखना चाहती और यही सबके सामने ना रख पाने वाली बात ही शारीरिक उत्पीड़न को शारीरिक शोषण में बदल देतें हैं। 

उत्पीड़न करने वाले अधिकतर परिचित ही होते हैं।

 Fact ये भी है कि sexual harass करने वाले बाहर के कम जान-पहचान के ,रिस्तेदार , दोस्त , बॉयफ्रेंड, कभी-कभी तो cousins भी इसमें शामिल होतें हैं। ये बच्चियों को , औरतों को कभी-कभी बालक भी , उनकी हवस का शिकार होतें हैं । इनका सॉफ्ट टारगेट घर की 4-14 साल की बच्चियां होतीं हैं क्योंकि ये जानते हैं कि इन्हें आसानी से डराया-धमकाया , बहलाया और चुप कराया जा सकता हैं। और ये नन्ही फूल सी बच्चियां घर में किसी को कुछ नहीं बता पाती क्योंकि उन्हें लगता है कि गलती उनकी है और उन्हीं को ही डांटा जाएगा या फिर बात उसने किसी तरह माँ को या बहन को बता भी दी तो रिश्तेदारों का दबाव आ जाता है , रिश्तेदारी में नाम खराब होता है , और रिश्तेदारी बनी रहे ऐसा सब सोच के दोनों पक्षों में सुलह हो जाती हैं आखिर कौन “छोटी-सी बात” के लिए झगड़ा मोल ले।

बात अगर बाहरी लोगों द्वारा उत्पीड़न करने की करें तो बाहर भी लड़कियों के साथ कुछ कम बुरा नहीं होता। हर बस में, हर ट्रेन में, हर सड़क पर , हर दफ़्तर में , कुछ ऐसे भेड़िये जरूर नजरें गड़ाए बैठे ही मिलते है इस ताड़ में कि कौन अगला शरीर है जिसे नज़रों से छलनी करने में उन्हें मज़ा आए। बेचारी लडकियां किसी तरह तो सफर पूरा करतीं हैं, अपना काम खत्म करतीं हैं , और घर पहुँच के अगर घर में किसी को कुछ बताती है तो अधिकतर तो कान ही नहीं दिया जाता । ऐसा ही एक उदाहरण मेरी कक्षा में पढ़ने वाली मेरी दोस्त अहसास का है । वो अपने पेरेंट्स के साथ ट्रेन में सफर कर रही थी उसके अभिभावक उससे थोड़ा आगे सीट पर थे और वो जिस सीट पर थी उसपर जो शख्स बैठा था वो बार बार उसे टच कर रहा था थोड़ी देर वो बर्दाश करती रही जब वो काफी डर गई तो अपनी माँ के पास चली गई और माँ को सब बताया तो माँ का जवाब था “सी…सी…सी चुप रहो! ऐसा लड़कियों के साथ होता ही रहता है।” उफ्फ! क्या ही खूबसूरत जवाब था आंटी जी का … लड़कियों के साथ ऐसा होता रहता है…।

लडकीयों के साथ ये ज्यादा क्यों होता है?



 इतना तो उन्होंने बता दिया लेकिन ये नहीं बताया कि ऐसा लड़कियों के साथ क्यूँ होता रहता है? मैं बताऊँ! क्योंकि उनके जैसे अभिभावक अपनी बेटियों का साथ नहीं देतें , क्योंकि उनकी माँ उन्हें चुप रहने को कहती है, क्योंकि लडकियां खुद को कमज़ोर मानती हैं, क्योंकि उन्हें black belt पहनने की जगह आप उन्हें दुपट्टे से कस देते हो , ऐसा इसलिए होता हैं क्योंकि आप अपनी बेटी के लिए एक ऐसा दायरा खींच के रखते हो जो” लक्ष्मण रेखा” से भी ज्यादा सख्त है, और ऐसा इसलिए होता है यार कि लडकियां अपना strong point नहीं जानती, क्योंकि लडकियां खुद को पापा की परी मानती है , अपनी अकड़ में जीने वाली शेरनी नहीं। बस यार यही वजह है कि लड़कियों के साथ ही ये सब ज्यादा होता है।

 शारीरिक उत्पीड़न रोकने के कुछ उपाय- 

  • ‌Sexual harassment को कम करने के लिए सबसे पहले माता-पिता को अपने बच्चे से खुल कर बात करनी होगी और उन्हें समझाना होगा कि आप उनके साथ हैं।
  • ‌अगर कोई किसी भी प्रकार की छेड़- छाड़ , इशारे या कुछ अपशब्द कहे तो बिना डरे उसका जवाब दे।
  • ‌किसी बात पे पहुंचने से पहले अपनी बच्ची की बात धैर्यपूर्वक सुने और गुस्सा करने की बजाय प्यार से समझाए।
  • ‌और हमेशा याद रखें झूठी शान किसी मासूम लड़की की मुस्कान से ज्यादा कीमती नहीं हो सकती।
  • ‌ लड़कियों को डरना नहीं मुँह तोड़ना सिखाये ।
  • ‌Dear girl’s, आपकी self respect , आपका आत्मविश्वास आपकी किसी भी जॉब से बड़ी duty होनी चाहिए आपके लिए।
  • Dear boy’s, आपके लिए जो सिर्फ मज़े मज़े की बात होती है वो हमारे लिए किसी दर्दनाक चलचित्र जैसी होती है जो जहन में आते ही हमें कांपा जाती है। Please मानव बनिए आदिमानव नहीं समझे बच्चे!😎😎 

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