तो वो कौन है….? part -4

 आप ने अब तक पढ़ा कि मिस्टर सिंह जी शादी के लिए मना तो नहीं करते लेकिन चाहते है कि सिद्धांत और रश्मि थोड़ा वक्त लेकर पहले एक दूसरे को समझ ले। जब यही बात सिड रश्मि से कहता है तो वो कहती है कि वो नहीं चाहती कि वो भी श्री जैसी अकेली रह जाए इसलिये वो जल्दी ही शादी करना चाहती है। बातों ही बातों में रश्मि को विन्नी के बारे में पता चलता है जो कि सिड का पहला प्यार थी। पर अब दोनों साथ नहीं हैं क्योंकि सिड की वजह से विन्नी के साथ कुछ बहुत बुरा घटित हुआ था , वो बुरा क्या था जिसका अफ़सोस आज तक है सिद्धांत ,को आइये जानतें हैं –

सिड, तुम्हारा अगर बताने का मन नहीं है , हिम्मत नहीं हो पा रही तो तो मत बताओ लेकिन ऐसे परेशान न हो ऐसे रोओ मत। रूआंसी सी रश्मि ने सिद्धांत को हल्का महसूस करवाने कि एक नाकाम सी कोशिश की।

मैं परेशान नहीं रश्मि, बस मुझे वो दिन याद आ गया और मैं एक बार फिर टूट गया….मुझे गम इस बात का नहीं कि वो मेरी जिन्दगी में नहीं बल्कि इस बात का है कि मैं उसे इन्साफ नहीं दिला सका। सिड अपनी आँखो के आंसूओं को जब्त करने की कोशिश करता हुआ आसमान देखने लगा, मैं हार गया यार…उसके…पैसे वाले बाप से…. 

कुछ नहीं ,तुम अब ये सब मत याद करो ये सब पूरानी बा…..

वो उस दिन लाख मना कर रही थी कि उसे घूमने जाने का बिलकुल मन नहीं है,जी अच्छा नहीं था उसका …तीन दिन से बुखार था मैंने सोचा ताजी हवा मिलेगी तो जल्दी ठीक होगी… वो मना करती रही और मैं अपनी ज़िद पर अड़ा रहा, थक हार कर वो साथ चलने को राजी हो गई। वो मेरा सहारा लेकर चल रही थी, किसे पता था…( सिड का गाला फिर भर आया).. किसे पता था कि वो आखिरी बार मेरे कंधो का सहारा लेकर चल रही है …. जिन बाहों में उसे लाल जोड़े में देखकर समेटने की इच्छा थी उन्हीं बाहों में…. उन्हीं बाहों में मैं उसका खून से सना शरीर लेकर चीखता रहा , चिल्लाता रहा लेकिन कोई नहीं था उस जंगल में हमारी मदद करने के लिए। जिन बाहों में उसने अपनी दुनिया बनाई थी उन्हीं बांहो..म्… उस.. ने… अपनी…जिन..द…गी भी…..इतना कहते कहते सिड के छत पर ही गिर गया। रश्मि बस उसे देखती रही।

वो लोग मुझे मारने आए थे… मगर मुझे धक्का देकर वो खुद कार के सामने खड़ी रह गई..और वो कार उसके शरीर के टुकडें करके….उसी जंगल…. में कहीं खो सी गई…. सिड खुद को संभालता हुआ अपने आंसूओं पर एक बार फिर काबू पाने की कोशिश करता है।

उसके बाद बिलकुल ख़ामोशी छा गई ऐसा लगा विन्नी उस दिन नहीं आज मरी हो । रश्मि की आँखों में ऐसे आँसू आ रहे थे कि जैसे वो अजनबी ना होकर उसकी अजीज दोस्त हो। सिड वैसे ही पड़ा रहा । इस ख़ामोशी के बीच बस हवा ने ही एकाध बार शोर मचाया बाकी तो ऐसा लग रहा था कि वक्त भी खामोश हो गया हो। काफी देर की ख़ामोशी के बाद रश्मि ने आहिस्ते से बोलना शुरू किया।

मैं बहुत खुशनसीब हूँ जो तुम जैसा प्यार करने वाला मुझे मिला।

विन्नी की जगह तुम्हें कभी नहीं दे सकता। उसने वैसे ही पड़े हुए कहा।

वो चाहिए भी नहीं मैं खुद की जगह आप ही बना लूंगी।इतना कहते हुए वो उसी के बगल में उसी की बांहपर सर रख के लेट गई और उसी तरह आसमान को घूरने लगी जैसे वो घूर रहा था।

अच्छा अगर उसके साथ जो हुआ उस बात का दोषी मैं होता तो..?

मत सोचो ऐसा …मैंने कहा न तुमसे कुछ नहीं हुआ है , तुमसे कभी कुछ ऐसा हो भी नहीं सकता क्योंकि तुम बहुत प्यारे हो बहुत प्यारे।

रश्मि की इस बात पर वो उदास आँखे और सूखे होठो के साथ हल्का सा मुस्कुरा दिया। उसका चेहरा देखा और उसका सर बांह से हटाता हुआ सीधा बैठ गया।

क्या हुआ?

कुछ नहीं।

कुछ तो ?

तुम्हें नहीं खोना चाहता बस ।

तो मुझे कभी नहीं खोओगे पक्का। अगर मुझे कुछ हो भी गया तब भी मैं आत्मा बनकर तुम्हारे बदन से लिपट जाऊंगी , ऐसे रश्मि झट से सिड कि पीठ पर लेटकर उसे अपने दोनों हाथो से कस लेती है।

अच्छा, सच में?

और नहीं तो क्या?

 माहौल थोड़ा हल्का हो चुका था और शाम रात में तब्दील हो चुकी थी। हवा की रवानी थोड़ी बढ़ गई थी मौसम के सरबत में थोड़ी सी सर्दी भी अपना गुलाबी रंग घोल चुकी थी। 

रश्मि , डैड तुम्हें बुला रहें हैं।

सिड इस आवाज से चौक गया , देखा तो टैरिस पर सीढ़ियों से थोड़ा आगे एक 27-28 साल की लड़की खड़ी थी सिड को ज़रा भी देर न लगी ये समझते हुए कि हो न हो ये जरूर लीना ही है क्योंकि श्री को तो वो सुबह ही देख चुका है उसके खून की प्यासी श्री…। उफ़ उसको क्यों याद करना…! ये लड़की भी तो कहीं उसके जैसी ही तो नहीं सनकी या पागल …. नहीं ऐसी नहीं लगती… कितने अच्छे से कपड़े और चेहरे पर उसे देख के कितनी प्यारी मुस्कान सजा रखी है। 

रश्मि… रश्मि! उसने फिर पुकारा। 

सिड हैरान हो गया कि बजाय जवाब देने के रश्मि ने अपना सर इस तरफ से हटा कर पीठ पर ही दूसरी तरफ कर लिया। सिड उसी की तरफ देख रहा हैं ये जान वो लड़की थोड़ी असहज हो गई बस हलके से हाथ हिला दिया तो सिड ने भी वैसे ही किया। “इस तरह साथ रहने से अच्छा है कि मैं इसे अपने साथ जल्द से जल्द लेकर चला जाऊं, चार लोगों के इस घर में जब ये दो से बात ही नहीं करती तो क्या फायदा ऐसी फैमिली का!” उसने मन ही मन सोचा। 

रश्मि डैड बुला रहे है जल्दी चलो। इस बार फ़िर एक आवाज आई लेकिन वो लीना की नहीं श्री की थी जो अपना तमतमाया हुआ चेहरा लिया अभी अभी टैरिस पर आयी थी।

तुम यहाँ क्यों आयी? 

क्योंकि जानती जो थी कि तुम्हें अगर कोई बुलाने न आए तो तुम तो सारी जिन्दगी यही इसकी पीठ पर गुजार दोगी , भले ही ये तुम्हारे सर के नीचे पत्थर लगा के चला जाए तुम आँख भी खोल के नहीं देखोगी।

श्री प्लीज अपनी ये बकवास अपने पास ही रखो.. गुस्से में रश्मि भी उसे घूरती हुई नीचे चली गई । छत पर रह गई आँखों में पानी लिए लीना ।

आप भी नीचे चलिए। सिड उसके पास आकर बोला।

नहीं आप जाइये मैं यही ठीक हूँ , इतना कहकर वो रेलिंग की तरफ बढ़ गई पीछे से सिड भी उसके साथ चल दिया।

आप तीनों आपस में इतना कटे कटे क्यों रहते हैं?

क्या करुँ वो मुझसे बात ही नहीं करना पसंद करती।

ऐसा कुछ नहीं है वो बस शर्मिदा है उसकी वजह से जो आपके…

आप मुझे आप मत कहिये।

तो आप भी तो मुझे आप कह रहीं हैं ।

क्योंकि मेरी बहन के होने वाले पति हो तो इज्ज़त तो देनी ही पड़ेगी…अगर दोस्त होते तो….

अगर दोस्त होता तो…?

तो शायद मैं आपको तुम कहती।

तो लो , सिड ने अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ा दिया। 

इतनी जल्दी….?

हाँ क्योंकि मैं चाहता हूँ कि तुम लोगों के बीच जो अनबन है उसे कितनी जल्दी ही न खत्म कर सकू।

अच्छा तो फिर दोस्त। लीना ने भी हाथ मिला लिया।

अब जब दोस्त हो ही गए है तो ये बताओगी कि रश्मि के हाथों ऐसा क्या बुरा हो गया तुम्हारे साथ कि वो अपने को इतना कोसती है?

वो पागल है ऐसा कुछ नहीं है जैसा उसने बताया।

लेकिन कुछ तो है वरना अंदर से कौन इतना गिल्टी फील करता है।

आप भी तो फील करते हैं गिल्टी विन्नी के लिए इसका मतलब ये तो नहीं कि आपने…

फिर आप …

सॉरी तुम अब ठीक है, वो मुस्कुरा दी धीरे से।

हाँ ये सही है।

अच्छा ये जो श्री हैं ये इतनी खूबसूरत हैं फिर भी एक लड़का भी इन्हें सच्चा प्यार करने वाला नहीं मिला।

अगर खूबसूरती से सच्चा प्यार मिलता तो तुम्हें क्या लगता है, मुझे इस पूरे शहर भर के लड़के का प्यार मिलना चाहिए था! याकि खूबसूरती के पैमाने के हिसाब से तो रश्मि को तुम जैसा पार्टनर मिलना ही नहीं चाहिए था?

नहीं मेरा मतलब ये नहीं था ,मैं तो बस श्री का नेचर जानना चाह रहा…… वो रुक गया फिर हलके से मुस्कुरा कर बोला ये तो वाकई सच कहा तुमने कि तुम्हें तो पूरे शहर भर के लड़कों का प्यार मिलना चाहिए था तुम हो ही इतनी खूबसूरत ।

ये तो कंफर्म नहीं पता पर इतना यकीन से जानती हूँ कि रश्मि से तो कई गुना ज्यादा खूबसूरत हूँ।

वो तो देखते ही कोई भी बता देगा।

एक बात बताओगे तुमने रश्मि में ऐसा क्या देखा जो तुरंत ही उससे शादी के लिए भी राजी हो गए?

लीना के इस सवाल पर सिड बस धीरे से मुस्कुरा कर उसे देखने लगा।

समझ गई लैला-मजनूं टाइप ही ,की पूरी दुनिया में चाहे कितना भी हुस्न क्यों न हो बस आँखे जिस पर….

नहीं ऐसा कुछ नहीं है बहुत भोली हैं वो हर बात पर यकिन करतीं हैं मेरी। 

तुम्हें पाता है ये किसी पर भी आँख बंद करके भरोसा कर लेने वाली लडकियां कभी भी प्यार नहीं पाती , बल्कि सच कहूँ तो ये प्यार करने लायक ही नहीं होतीं।

तुम ऐसा क्यूँ बोल रही हो?

लीना ऐसा क्यों बोल रही थी ये तो काफी सोचने वाली बात है वो भी अपनी बहन के बारे में ये तो और सोचने की बात है, तो मैं इसपर सोच कर आपको अगले पार्ट में बताऊंगी तब तक आप भी ये सोचिए।

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