थोड़ी-सी सच्चाई। part-1

 कभी-कभी इंसान के सामने ऐसी सिचुएशन ले आती है कि जो उसने कभी सपने में भी न सोचा हो वो हकीकत में करना पड़ जाता है। सही है गलत है बिना ये सोचे अपने सर को हाँ की आकृति में ऊपर-नीचे घुमाना ही पड़ जाता हैं। चलो ये तो इस दुनिया की बातों पर होता हैं सोचिए अगर आपको किसी और दुनिया के लोगों को ऐसे डील करना पड़े तब ? जी हाँ मेरी इस नई कहानी के नायक प्रणय कुमार श्रीवास्तव को एक ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा जिसके लिए वो कभी तैयार नहीं था। 

पढ़े  वो कौन है… horror story

मेरी कहानी का नायक प्रणय ग्रेजुएशन कर रहा है हिस्ट्री से क्योंकि बचपन से ही उसे इतिहास से अपने बालों जितना ही लगाव रहा हैं । उसके हलके घुंघराले , काले ,बाल उफ! बाल नहीं लड़कियों के दिल की धड़कन और और प्रणय की जान । वो प्रतिदिन अपने बालों पर अमूमन किसी लड़की से ज्यादा ही समय देता है और बाकी बचा समय इतिहास के गड़े मुर्दे उखाड़ने में ही बिताता है। 

प्रणय न किसी से डरता है ना डराता है , खूबसूरत है मगर फिर भी कभी-कभी लोग उससे थोड़ा-सा डर जाते हैं क्योंकि… उसे बचपन से ही hallucinations होतें हैं। (ऐसी सिचुएशन जिसमें व्यक्ति को वो दृश्य दिखाई देतें हैं जो सामने होते ही नहीं, कभी-कभी तो वो इस दुनिया से भी बाहर के होतें हैं) इसीलिए ट्रीटमेंट चल रहा है उसका उसे कभी कुछ महसूस होता है तो कभी कुछ सामने घटित होता दिखाई देता है जो किसी और को नहीं दिखता । 

उसकी सबसे खास दोस्त गौरी, एकलौती ऐसी इंसान है जो उसकी इस दिक्कत को बिलकुल उसी की तरह समझती और महसूस करती है। ऐसा नहीं है कि प्रणय के माँ-बाप कुछ कम परेशान होतें हैं उसके लिए लेकिन जिस हिसाब से गौरी उसे संभालती है वैसे कोई उसे नहीं संभाल पाता । बचपन से ही वो उसे संभालती आयी है और अब ग्रेजुएशन में भी उसी के साथ है। आज प्रणय को उसी से मिलने जाना था पर अभी तक वो गया ही नहीं।

एक बात बताओ तुम्हें अगर कोई काम करवाना हो मुझसे तो ये भी मुझे ही फोन करके याद दिलाना पड़ेगा है न? गौरी का लहजा सख्त था क्योंकि वो तंग आ चुकी थी इसकी लेट-लतीफी से ।

ओह स्से…ट ! प्रणय ने सर पकड़ लिया मैं , यार पता नहीं तू न हो तो मेरा क्या होगा, तूने अगर मुझे फोन न किया होता तो मैं तो सब भुलाये बैठा था। 

हाँ अब यही तो काम ही रह गया है मेरा की मैं मिस्टर श्रीवास्तव के लड़के का कॉलेज रूटीन बताऊँ उन्हें। स्कूल में जिस तरह होमवर्क पूरा करती थी अब नोट्स और Assignments पूरे करुँ ? मैं एक काम करुँ न .. तुम्हारी नैनी ही बन जाती हूँ मैं इससे तुम्हें…

अब बस भी कर दे न यार और कितना सुनाएगी?

अच्छा तो मैं सुना रही हूँ!

ओफ्फो जितनी देर से तू बकवास कर रही है उतनी देर में मैं एक चैप्टर और खत्म कर लेता।

ओह!तो ये बात है सुबह से तू किताबें ही चाट रहा है , चाट ले , जब इतिहास से मन भर जाए तो थोड़ा अपने भविष्य पर भी ध्यान दे लेना और मेरे को कॉल कर लेना।

अरे सुन तो यार पहले से ही मेरा मूड खराब है और तू भी झगड़ा करेगी तो बता रहा हूँ मैं….

मूड क्यों खराब है तेरा … गौरी ने उसकी बात बीच में ही काट दी, किसी ने कुछ कहा क्या ?

नहीं यार Actually…क्या बताऊँ तुझे..

जो हुआ वो बता , गौरी ने शायद अपने गुस्से पर काबू कर लिया था।

यार दो तीन दिन से एक लड़की बहुत परेशान कर रही है और आज सुबह तो वो वॉक पर भी आयी थी। प्रणय के लहजे में अजीब सा बेबसपन नज़र आ रहा था।

ओहो बुद्धू राम लड़की से तंग है.. गौरी ने मजाक बना दिया उसका।

नहीं , उसकी बातों से परेशान हूँ मैं बस..।

अच्छा ऐसा क्या कह दिया उसने कहीं तुम्हारे बालों को तो कुछ नहीं कह दिया। वो फिर हँसी।

जाओ यार बताता ही नहीं कुछ मैं। वो नाराज हो गया। तो गौरी उसे मनाने लगी अच्छा बता तो मैं मजाक नहीं बनाउंगी पक्का।

वो कहती है मैं उसकी मदद करुँ , उसके साथ जाऊं गोवा तक…।

गोवा..? कैसी पागल लड़की है, गोवा से मदद लेने तेरे पास यहाँ चंडीगढ आयी हैं । वहाँ कोई नहीं बचा उसकी मदद करने वाला..?

हाँ मुझे भी यही लगता है , बोलती है कि  एक बार मैं उसके मंगेतर से उसकी बात करवा दूँ बस फिर वो कभी नहीं तंग करेगी मुझे।

एक मिनट… उसके मंगेतर से तू कैसे बात कराएगा उसकी अगर उनका झगड़ा हुआ है तो वो खुद आपस में सुलझाए , मंगेतर को मनाने के लिए इतनी दूर आकर तुझ से रिक्वेस्ट करने की क्या जरुरत है? 

क्या जानूँ? मैंने कहा भी कि मैं फोन पर कॉल कर देता हूँ तो बोलती है नहीं फोन पर बात हो ही नहीं पाएगी वो सिर्फ मेरे द्वारा उससे बात कर सकती है क्योंकि…?

क्या क्योंकि…?

क्योंकि …क्योंकि वो .. अब.. She is dead now. प्रणय एक ही सांस में बोल गया।

Not again God ! गौरी उधर से धीरे से लम्बी सांस में फुसफुसाई।

क्या कहा तुमने?

Nothing much, दवा खायी है न आज की तुमने।

What rubbish..?तुम ये बोल रही हो की ये मेरा वहम है ।

नहीं .. मैंने कहा तुम आराम करो किताब बंद कर के मैं तुम्हारे नोट्स बना कर कल मैम से चेक भी करवा लूंगी और शाम तक तुम्हें दे भी जाउंगी।

मैं जानता था तभी अभी तक नहीं बताया था , मुझे पता था तुम यही समझोगी।

और हाँ कल शाम में मूवी देखने का प्लान भी है मेरा तो साथ ही में चलेंगे।

मैं सच कह रहा हूँ यार मुझे कोई hallucination नहीं हो रहा है अगर ये मेरा वहम होता…

प्रणय.. गौरी ने बात बीच में ही काट दी , हर बार की तरह ये तुम्हारा वहम ही है इसे स्वीकारों और डॉ से मिलने जाओ । 

यार…! उसने गहरी सांस ली। 

परेशान मत हो अब तुम्हारे hallucinations कम हो रहे हैं कुछ साल में शायद खत्म भी हो जाए समझे। इसे ज्यादा गंभीरता से मत लो .. और हाँ अबकी बार जब वो तुमसे मिले और बात करने की कोशिश करें तो न उसकी तरफ देखना न बात करना । वो आप ही आप खत्म हो जाएगी।

ओके। 

तो अब मैं फोन रखती हूँ तुम अपना माइंड व्यस्त रखना।

ओके।

क्या ओके कुछ बोलो तो।

हाँ मैं दिमाग खाली नहीं रखूँगा बस।

ओके बाय।

हूँ..फोन कट चुका था गौरी का ।

हाँ मुझे शायद फिर से भ्रम हुआ है। प्रणय खुद को समझाने लगा ।

क्या ये वाकई उसका भ्रम था ? अगर आपको ये जानना है तो कीजिये “थोड़ी-सी सच्चाई ” के नेक्स्ट ब्लॉग का इंतजार। आज का ब्लॉग कैसा लगा आप ये मुझे ईमेल के द्वारा बता सकतें हैं।

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