थोड़ी-सी सच्चाई part-6

अभी तक की कहानी में आपने पढ़ा कि प्रणय और महिमा का झगड़ा हो गया है, क्योंकि महिमा ने प्रणय और गौरी के रिश्ते को गलत समझा। झगड़ा इतना बढ़ गया कि महिमा ने कुछ ऐसी बातें कह दी जो प्रणय का मस्तिष्क स्वीकार नहीं कर पाया। जिसकी वजह से उसकी तबियत खराब हो गई अब आगे-

प्रणय अचेत अवस्था में आँखे मूंदे बिस्तर पर पड़ा था ,बगल में उसकी माँ सिसक-सिसक कर रो रही थी और गौरी उन्हें सांत्वना दे रही थी अब्  तक तो उन्हें सारी बात भी पता चल  गई थी कि आखिर प्रणय क्यों गोवा जाना चाह रहा था। वैसे तो प्रणय की माँ पुराने खयालो की हैं भूत-प्रेत में यकिन करतीं हैं लेकिन इतनी बार प्रणय को दवा से ठीक होते देखा है, उसकी बीमारी देखी है तो उनका इन सब बातों पर विश्वास धुंधला हो गया था। लेकिन आज जो उन्हें बातें गौरी ने बताई तो फिर से इन सब बातों पर यकीन करने का दिल करने लगा।

प्रणय ने आँखे खोली उन दोनों को देखा और फिर करवट बदल के लेट गया, शायद आँसू छुपा रहा था जो महिमा से मिले थे उसे।

तुम गोवा किसलिए जा रहें थे? उसकी माँ ने पूछा, प्रणय जानता था कि माँ अब तक सब जान चुकी होगी। उसने कुछ नहीं कहा वैसे ही लेटा रहा। थोड़ी देर तो उसकी माँ कुछ नहीं बोलीं। फिर कमरे के बाहर जाते हुए सिर्फ इतना कह गई “टिकट cancelle कर दो तुम अब घर के बाहर कहीं नहीं जाओगे। ये कहते हुए आवाज़ काफी सख्त थी उनकी लेकिन उनका दिल काफी भीगा हुआ था , आँखों के साथ-साथ। उन्होंने बचपन से ही प्रणय को सभी से छुपा के रखा था , जब उसे बड़ा होते देखा तो सोचा अब उसे आजाद रहने दिया जाना चाहिए अब कोई दिक्कत होगी तो वो खुद संभाल लेगा। लेकिन आज उन्हें ये अपनी सबसे बड़ी गलती लग रही थी। 

मैंने कहा था न कि मत पड़ इस चक्कर में तूने ध्यान ही नहीं दिया। देख हालत क्या हो गई है तेरी? गौरी प्रणय के चेहरे की ओर देखते हुए बोली।

गौरा..तुझे मुझ पर भरोसा है ? हलकी सी गर्दन उठाकर लाल आँखों से प्रणय ने गौरी को देखा।

ऐसा क्यों बोल रहा है यार , मुझे तुझपर कल भी भरोसा था , आज भी है आगे भी रहेगा।

तो मुझे क्या दिक्कत हुई है वो तुझे बाद में बता दूँगा,बस इसकी वजह क्रिस्टीन को मत समझना।

again क्रिस्टीन , अब तेरे मुँह से मैं ये नाम ना सुन लूँ वरना कसम से बात नहीं करुँगी तुझसे।

लेकिन यार ऐसा नहीं है जैसा तुम सब सोच…

हम लोग नहीं सोच रहे कुछ, सोच तो तुम रहे हो प्रणय, और मैं नहीं चाहती की तुम कुछ सोचो। गौरी थके स्वर में बोली। इसके बाद प्रणय कुछ नहीं बोला। थोड़ी देर बाद गौरी भी उठकर कमरे के बाहर चल क्योंकि डॉ ने प्रणय के आराम करने को बहुत ज्यादा जरुरी बताया था ताकि उसके दिमाग पर कोई जोर न पड़े।

लेकिन प्रणय लेटे-लेटे पता नहीं क्या सोचने लगा ,उसे लगने लगा कि वो सचमुच पागल है, दो बूंद आँसू और लूढ़क गए बिस्तर पर उसकी आँखों से निकलकर।यही सोचते-सोचते वो कब नींद की आगोश में चला गया पता ही नहीं चला। काफी देर बाद उसकी आँख तब खुली जब उसने किसी की आवाज़ सुनी। उसने चारों तरफ देखा तो बाहर अँधेरा चढ़ आया था कमरे में भी लाइट जला गया था कोई। आहिस्ते से कोशिश करके प्रणय उठ कर बैठा तो वैसे ही बैठा रह गया। वो आवाज़ किसी और ने नहीं बल्कि क्रिस्टीन ने दी थी जो उसके सामने खड़ी थी। थोड़ी देर तो प्रणय हैरान रहा फिर धीरे से हँसा और खुद से ही बोला मैं सच मे पागल हूँ सच कहा था माही ने। उसकी तरह देखा और फिर उसे अनदेखा कर दिया।

प्रणय….। उसने शांत स्वर मे नाम लिया।

जानती हो तुम अब तक की मेरी सबसे ढींठ imagination हो जो खत्म ही नहीं होती।

आज के लिए बस इतना ही दोस्तों,लेकिन सोचने की बात यही है कि क्या सच में क्रिस्टिन उसकी imagination ही हैं? अब क्या वो खुद को बीमार मान लेगा? ऐसे ही चन्द सवालों के जवाब मैंने बचा कर रखें है अगले भाग में देने के लिए, तो आप उस भाग का इंतजार कीजिये और अपना ध्यान रखिए।

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