मंदिर-मस्जिद हुआ पुराना , बताती हूँ मैं आपको इबादत का नया ठिकाना

 मेरी यूनिवर्सिटी के सामने से प्रदेश की पहली मेट्रो गुजरती है बड़े से पक्के मजबूत पुल का सहारा लेकर।उसी पुल का सहारा लेकर जिसके बड़े और मोटे से स्तम्भो पर प्रदेश के सबसे बड़े मॉल का विज्ञापन लगा है। मैं जब भी उधर गई हमेशा मेट्रो को ही देखा या कभी-कभी सरसरी निगाह पास ही बनी मुझको लालच से भर देने वाली बेकरी पर भी ध्यान दे दिया है बस इतना ही मेरा यूनिवर्सिटी के बाहर के नजारे से सम्बन्ध है। मैंने कभी सबसे मजबूत पिलर पर लगे up के सबसे बड़े मॉल, लुलु मॉल की विज्ञापन ही ध्यान से नहीं देखी जिसमें कुछ बच्चे पानी में खेल रहें होते हैं। इसके लिए आज मुझे बहुत पछतावा हो रहा है मैं तो मानती हूँ इस गलती के लिए मुझे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए बिना किसी रियायत के। मैं भला all in one place की अनदेखी कैसे कर सकती हूँ ? 

लेकिन अगर मैं अपनी सफाई में कुछ कहना चाहूंगी तो सिर्फ इतना की मुझे लगा लुलु मॉल कोई मामूली सी जगह है नन्हें बच्चों के लिए। आपके खुदा , भगवान , अल्लाह की कसम खा कर कहती हूँ मुझे ज़रा भी इल्म नहीं था कि ये बच्चों के लिए नहीं बल्कि हम जैसे “Matured people ” की सुविधा के लिए बनाया गया स्थान है। जो बेचारे दिन भर व्यस्त रहते हैं ना वैष्णव धाम जा पाते हैं ना मदीना का टिकट कटा पाते हैं, ना सुबह की पूजा को वक्त दे पाते हैं ना दुपहर की अजान पर ही ध्यान जाता है।
ऐसे में अगर बहुत बड़े बिज़नेस मैन M.A. yusuff ali जी ने ये मॉल बनाया है और माननीय आदरणीय ईश्वर तुल्य हमारे मुख्यमंत्री योगी जी ने इसका उदघाटन किया है तो ऐसे में एक बार तो मुझे इसकी तरफ अपनी तुच्छ दृष्टि करनी ही चाहिए थी ताकि मैं मॉल-कम-धार्मिक स्थल पर विचार करके ही खुद को धन्य कर लूँ। अगर मैं इन दोनों में से किसी से भी कभी भी मिली तो इनके चरणों में लोट जाउंगी और उठूंगी ही नहीं आखिर इन्होने हमारी इतनी बड़ी मुश्किल जो हल कर दी है और ये साबित कर दिया है कि ईश्वर कण -कण में विद्दमान हैं। पहले जहां हमको शॉपिंग करने के लिए मॉल जाना होता था और आराधना के लिए मंदिर-मस्जिद अब ऐसा कुछ नहीं है। आपको मूवी देखने से लेकर , साबुन खरीदने और स्विमिंग करने से लेकर अंडरवियर खरीदने के साथ-साथ अपने ईश्वर ,अल्लाह तक की इबादत का सुअवसर भी एक ही स्थान पर मिल रहा है । ऐसी अद्भुत जगह पूरी दुनिया में कहीं नहीं मिलेगी आपको ये दुनिया का पहला मानवनिर्मित पवित्र संगम है जहाँ ईश्वर के साथ-साथ केसर भी आपको उचित दामों पर मिलेगा।

बस आपको मॉल जाते समय एक हनुमान चालीसा जेब में डाल लेनी है ताकि शॉपिंग करते-करते आप पूजा भी कर सके , या आप एक टोपी रख ले जेब में और समय और स्थान मिलते ही अपने अल्लाह से भी मिल ले। लेकिन हाँ नमाज पढ़ते समय दिशा और समय का जरूर ध्यान रखे वरना फिर आपके धर्म पर ऊँगली उठ सकती है क्या है ना कि अभी पिछले दिनों ही कुछ आठ-दस युवक इसी पवित्र स्थान पर नमाज पढ़ने गए थे लेकिन काबा की तरफ उनका सर था ही नहीं ,पश्चिम दिशा में सबके सब सर झुकाये थे मूरख और मात्र 18 सेकंड में नमाज भी खत्म कर ली। इसीलिए आपसे कह रही हूँ कि नमाज करने जाए तो पूरा वक्त लेकर जाए वरना लगेगा कि आप टोपी-टापी धर के किसी समुदाय विशेष को बदनाम करने की साजिश कर रहें हैं। भला किसी मुसलमान को काबा की दिशा नहीं पता होगी या नमाज कितनी देर करनी चाहिए ये नहीं पता होगा ? खैर शायद मॉल की मोटी-मोटी दीवारों की वजह से उन्हें दिशा भ्रम हो गया होगा और कहीं जाने की जल्दी में उन्हें 8 मिनट की अजान 18 सेकंड में खत्म करनी पड़ी होगी। 

खैर मुझे आपलोग लुलु का ब्रांड एम्बेसडर ना समझ लेना मैं तो बस भक्ति में डूबी हुई एक साधिका हूँ जो मथुरा से जम्मू और फिर केदारनाथ जाने की प्लानिंग कर रही थी लेकिन लुलु मॉल खुल गया है तो मुझे लगता है अब मेरी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाएँगी। 

तो मैं तो बस इतना ही कहूँगी जय लुलु महाराज की और जय हमारे देश की धर्मप्रिय राजनीति की और इस जय के लिए आहुति सहिष्णुता की ताकि साम्प्रदायिकता अमर रहें।

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