सावन में शिव ही नहीं स्वयं का भी अस्तित्व तलाशें….

 आषाढ़ मास जा चुका है और सावन का पहला सोमवार 18 तारीख को आने वाला है ,सावन का सोमवार बोले तो शिव का दिन । इस दिन महाकाल के भक्त सुबह से ही उन्हें सजाने-संवारने में लग जाएंगे दूध से नहलाएंगे ,हरे-हरे बेलपत्र और सफ़ेद फूलों से शिव का श्रंगार होगा बची-खुची कसर भांग और धतुरे से पूरी की जाएगी, उनकी मनमोहक छठा देखते ही बनेगी। चलिए ये तो हुई शिव की बात अब आप की बात करें! अरे हाँ भई, आराध्य को खुश करने के लिए अराधक का खुश होना भी तो जरुरी है …। शिव को खुश करने के तो सैकड़ो तरीके आतें हैं आपको लेकिन खुद को खुश करने के 10 भी आते हैं भला?

मैं दुनिया का सबसे मुश्किल काम खुद को खुश करना मानती हूँ ये जो Dear self है ना कभी-कभी बड़ी-बड़ी इमारतों ,महंगी गाड़ियों , देर रात तक की पार्टीस से भी खुश नहीं होता। लेकिन सबसे आसान काम भी मैं खुद को खुश करना ही मानती हूँ कांटो में फसी तितली की ज़रा मदद क्या कर दी दिल प्रफुल्लित हो जाता है किसी नन्हे बच्चे को सोते या मुस्कुराते क्या देख लिया चेहरे पर आप ही डेढ़ इंच की मुस्कान फैल जाती है,और सबसे आसान तरीका जानते है खुद को खुश और स्वास्थ रखने का क्या है, वो है सावन की रिमझिम रिमझिम बारिश में बिना किसी परवाह के भीग जाने देना क्योंकि जब आप के बदन पर बारिश की नन्ही-नन्ही बूंदे गिरती है तो ना सिर्फ आपका शरीर बल्कि आपका मन भी धूल जाता है। बारिश में जब आप दोनों बांहे खोलकर बादलों का स्वागत करते है तो वास्तव में आप एक सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत कर रहें होते हैं। साफ शब्दोंं में अगर आपको समझाऊं तो आप इन बादलों को शिव का मेघदूत समझ सकतें हैं ये बादल भी शिव की तरह सरल, मस्त और फक्कड़ होते हैं, शिव की तरह जब किसी पर खुश होते हैं तो उसे अपना सर्वस्व देने को तैयार रहते हैं और किसी से नाराज हो जाए तो उसकी तरफ से बिना बरसे ही चलें जातें हैं तो क्यों नहीं आप अपने बदन को शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने देतें।ज़रा बाहर निकलिये बारिश से कुछ देर बातें कीजिए। 

अगर आप डर रहें हैं, अरे नहीं बारिश में भीगेंगे तो Immunity system खराब हो जाएगा आप बीमार हो जाएंगे तो बता दूँ इस मौसम में मनुष्य का पाचन तंत्र खुद ही कमज़ोर रहता है उसमें भीगने ना भीगने से कोई फर्क नहीं पड़ता और फिर आप शिव की साधना में लिप्त रह ही रहें हैं सोमवार का व्रत तो कर ही रहें हैं और एक दिन के व्रत का मतलब body boost करना, शरीर के आंतरिक अंगों की सफाई होना और स्वास्थ्य महसूस करना होता है। तो सावन से कैसा डर ? 

कभी-कभी हम भीग नहीं सकते, चाहतें हैं फिर भी नहीं भीग सकते तो ऐसे में पता है आपको क्या करना चाहिए? अपना favorite music बजाना चाहिए और एक डायरी लिखने बैठ जाना चाहिए और उसमें वो बातें लिखनी चाहिए जो आप पाना चाहते हैं, जो कमी है आपमें , future goals आदि क्योंकि बारिश के मौसम में आपका मन काफी ईमानदार हो जाता है आपके प्रति और आपको हर बात सच-सच बताने लग जाता है । अगर लिखने का मन नहीं हो रहा तो कुछ बनाने ही बैठ जाइये कॉपी pencil लेकर और वही बनाना जो जेहन में काफी वक्त से चल रहा हो । 

बाहर होती बारिश को देख के किसी को याद करने के बजाय आप अपने पालतू pet के साथ टाइम बिता सकतें हैं कोई खेल खेल सकतें हैं उनके साथ ।क्योंकि इस मौसम का असर सिर्फ आपके mood पर ही नहीं पड़ता ये सिर्फ आपका सिरोटोनिन कम नहीं करता बल्कि उन्हें भी एफेक्ट करता है । इसीलिए जब आप खुद के लिए ही सही लेकिन उन्हें टाइम देते है तो दोनों का ही emotional damage repair होता है। अगर आपके पास pet नहीं है तो आप बारिश की बूंदो से कदमताल करते हुए थोड़ा-बहुत नाच सकती है सिर्फ बूंदो की टुपुर-टुपुर सकतें है। 

 वैसे एक और आईडिया भी आप सोच सकते है वो है अपने बजट के हिसाब से सोलो ट्रैवेलीन्ग का , वैसे तो दोस्त,फैमिली भी साथ लेकर जा सकते हैं लेकिन अकेले जाने पर आपके पास खुद को जानने के अवसर बढ़ जाएँगे। शिव भी तो अकेले-अकेले इस जंगल से उस उपवन , इस पर्वत से उस तपोवन ऐसे ही खुद को बेहतर बनाया करते थें।

पूरा लब्बोलुआब तो ये है सारी बातों का कि जब आप शिव से प्रेम करतें हैं तो सावन से कैसे आपत्ति कर सकते हैं! शिव की भक्ति के साथ अपनी शक्ति की भी तलाश करिये । शिव से सारा संसार है और आपसे “आपका संसार”है। और हाँ फल प्राप्ति के लिए स्वास्थ मन से की गई दुआ कुबूल होती है उदास ,निराश या अस्वस्थ मन से की गई नहीं।

3 thoughts on “सावन में शिव ही नहीं स्वयं का भी अस्तित्व तलाशें….”

  1. Bahut achha likha hai dear……agr kisi ki help krne se(agr use Sach me madad ki jarurat hai to) hamare chehre pr muskan aati hai to yh bhi khud ko khush rkhne ka tarika hai ki aap kisi ashay ki help kre….shiv asyah nhi hai…isliye unko khush rkhna hamari duty nhi hai aastha hai….aastha mandatory nhi hai…mn kre aap kre mn n kre to aap n kre….kyoki shiv ashay logo ko dekho se ubarne ka kam krte hai….mai shiv ko khush rkhne k liye kbhi is prakar ka kary nhi kiya…..mujhe bhi lgta hai ki shiv ko khus rkhne k bajay Apne aap ko khush rkhe….😊

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