क्यों इतने आक्रामक होते जा रहें हैं मासूम से ये बेजुबान? कैसे दूर करें अपने pet की एंग्जायटी ?

 लखनऊ जुलाई 12 को 80 वर्षीय महिला अपने दो पालतू डॉग्स को खाना खिलाने  बाद छत पर टहलाने ले गई थी। अचानक से उनमे से ब्राउनी नाम की पिटबुल नस्ल की डॉग ने आक्रमक होकर अपनी मालकिन पर हमला कर दिया और उसे तब तक नोचा जबतक शरीर से मांस को अलग नहीं कर दिया। चीख सुनकर परिजन जब ऊपर पहुंचे तो वहाँ का नजारा देख दंग रह गए। आननफानन में नजदीकी अस्पताल लेकर गए लेकिन फिर भी उन्हें नहीं बचाया जा सका। इस घटना के बाद शहर में पिटबुल नस्ल के डॉग को लेकर काफी खौफ बैठ गया लोगों में, जोकि सही भी था क्योंकि पिटबुल काफी खतरनाक प्रजाति का कुत्ता मना जाता है । इसका गुस्सा इतना खतरनाक होता है कि अमेरिका, कनाडा , फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी समेत 41 देशों में इसे बैन किया गया है।

नगर निगम भी इसके बाद काफी सख्त हो गया, डॉग्स रजिस्ट्रेशन भी बढ़ गए लेकिन इतना सब होने के बाद भी लोग नहीं जागरूक हुए जिसका नतीजा हालिया में घटित एक के बाद पिटबुल अटैक के रूप में सामने आयी। 

8 सितंबर को 11 वर्ष के पुष्प त्यागी पर पार्क में खेलते समय एक पिटबुल ने हमला कर के उसका एक कान चबा डाला और उसके गाल को इस कदर नोचा कि 150 से ज्यादा टांके उसके गाल पर लगे।

बात यहाँ पर सिर्फ पिटबुल ब्रीड की नहीं हो रही कुछ अन्य केसेस भी आ रहें हैं जिनमें कुत्ते ने व्यक्ति पर हमला किया हो। गाजियाबाद में कक्षा 4 में पढ़ने वाले एक मासूम से बच्चे को लिफ्ट में एक बीगल नस्ल के कुत्ते ने मालकिन के हाथों से छूट कर अपना निशाना बना लिया और उसकी टांग को जख्मी कर दिया। लखनऊ का ही एक अन्य मामला इन दिनों चर्चित हैं, एक डिलीवरी बॉय को जर्मन शेफर्ड ने हमला कर घायल कर दिया। 

ये कुछ घटनाएं हैं जो मीडिया में आयी जबकि हकीकत में इनकी संख्या और ज्यादा है। अकेले गाजियाबाद और नोएडा में ही एक दिन में क्रमशः 120 व 300 मामले कुत्ते द्वारा हमला करने के आतें हैं। ये सिर्फ लखनऊ के दो सेक्टर्स के ही आंकड़े हैं, अगर पूरे इंडिया में ऐसे मामले देखें जाए तो इनकी संख्या (per year) 17.4 मिलियन हैं।

 

क्या वजह हैं जिनकी वजह से आक्रामक होते जा रहें हैं कुत्ते ?

 आजकल अधिकतर लोग पपीज/ डॉग्स, एनिमल लव या हॉबी के लिए नहीं बल्कि समाज में अपना स्टेटस दिखाने के लिए पालते हैं। एक से एक महंगी ब्रीड के, रौबदार और खतरनाक उतने ही कठिन और महंगे उनके रख-रखाव के खर्चे। जिनकी कोई अच्छी-खासी जॉब हो या जो खानदानी रईस हो वो तो इनके खर्च देख लेते हैं लेकिन माध्यम वर्ग के किसी भी इंसान के लिए इन्हें इनकी इच्छा और हेल्थ के हिसाब से डायट देना थोड़ा मुश्किल हो जाता है , जैसे एक पिटबुल को रहने के लिए 20 वर्ग मीटर का स्वच्छ, हवादार कमरा + ओपन एरिया चाहिए होता हैं जोकि शायद ही इन्हें एक मिडिल क्लास फैमिली में मिले। 

चलिए जैसे तैसे आपने इन्हें रखने का मैनेज कर लिया, खाना भी देख लिया इनका फिर बात आती हैं अटेंशन की। आप लोगों को दिखाने के लिए या शौकिया तौर पर ले तो आए इन्हें लेकिन ध्यान रख पा रहें हैं इनका? ध्यान रखने से मेरा मतलब ये नहीं कि हर महीने वेट के साथ मीटिंग फिक्स, ग्रूमिंग के लिए सैलून फिक्स ये काम तो आपके रामू काका भी करवा लाएंगे, बात हैं समय की। आप कितना वक्त निकाल पाते हो अपने पेट के लिए ? उससे कितनी बातें करतें हो या उसकी कितनी बातें समझते हो? उसके साथ रात में सोते हो कि छोटे से पपी को अकेले किसी कोने में लिटा देते हो? जब कुत्ते को आप अटेंशन नहीं देते तो वो चिडचिडे हो जाते हैं, परेशान रहने लगते हैं क्योंकि कुत्ते एक वक्त भूखे तो रह सकते हैं लेकिन बिना किसी प्यार/ दुलार/Cuddling के नहीं।             

                                    घर में जब तेज आवाज़ में झगड़ा होता रहता हैं तनाव की स्थिति बनी रहती हो, आपस में प्रेम भाव की कमी हो, सब अपने-अपने में ही व्यस्त हो तो इसका असर भी pet के दिमाग पर पड़ता हैं। देखिये आप माने या ना माने लेकिन एक नन्हे से पालतू पशु की भी उतनी ही देखभाल करनी पड़ती हैं जितनी कि अपने बच्चे की। जब ऐसा नहीं होता तो या तो वो बिलकुल दब्बू, भीरु और चुपचाप कम मिलनसार हो जाता है, ऐसे में जब ज्यादा भीड़ देखते हैं तो आक्रामक हो हमला कर बैठते है, या वे चिडचिडे और गुस्सैल हो जाते हैं ऐसे में कभी-कभी अपने मालिक पर भी आपा खो देते हैं ये और आते-जाते लोगों पर हमला करना इनके लिए कोई नई बात नहीं रह जाती। कभी-कभी जब घर में दो या दो से अधिक furr baby होतें हैं और एक का ध्यान अधिक रखा जाता है और दूसरे का कम तो उनकी जलन उन्हें खूंखार बनाने का काम करती हैं, वे पहले तो लोगों पर भौकना , दौड़ाना शुरू करते हैं अगर इस पर भी उनपे ध्यान नहीं दिया जाता या फिर सजा दी जाती हैं तो वे और आक्रामक हो जातें हैं।         

             उनको खेल खेल में नोचने, काटने की आदत डालना, कोई भी सामान दांतो से काटने देना , Good bite or bad bite का अंतर उन्हें ना समझाना भी एक बड़ा कारण हैं मासूमों को खतरनाक बनाने का।

किस तरह रोकें इन्हें?

सबसे पहले तो हमें अपने डॉग को किसी भी तरह की एंजायटी से दूर रखना होगा। जिसके लिए सबसे मुख्य ये हैं कि उनके शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें। (1) उसके लिए आपको अपने angel के साथ टाइम बिताना सबसे ज्यादा जरुरी रहेगा। अगर आपके पास टाइम की कमी है तो दिन में जब भी थोड़ा भी टाइम मिले उसमें बस आपको अपने पेट के सर पर हाथ फेरते हुए 2-3 मिनट बातें कर लेनी हैं बस जिससे उन्हें अहसास रहेगा की आप को उनकी फ़िक्र है। (2) अगर आप नोटिस कर रहें है कि आपका pet उदास या चुपचाप रह रहा हैं तो आप उसे हफ्ते में तीन दिन हेड मसाज दे, दिन में एक बार तो जरूर उसके बेली को रब करें और उसके कानों को भी खुजलाएं इससे उनमे फील गुड वाला हार्मोन सक्रिय होगा और उनके चिडचिडेपन में कमी आएगी। 

(3) अगर कुत्ता बिना वजह के लोगों पर भौकता हैं तो उसे नजरअंदाज ना करें बल्कि उसे ट्रेनिंग दे कि कब और किस पर भौकना चाहिए। (4) खेलते-खेलते जब भी pet आपका हाथ या कोई अन्य भाग कसके काटे तो तुरंत खेलना बंद कर दें दो तीन बार ऐसा करने से उसे अपनी गलती पता चल जाएगी। (5) अगर घर में दो कुत्ते हैं तो हमेशा ध्यान रखें कि किसी को भी जलन ना हो दोनों को ही बराबर प्यार दें। अगर आपको एक अति प्यारा हैं तो उसे दुलार करते वक्त यह देख ले कि अन्य दूसरा आसपास ना हो।

क्या करें जब डॉग करें अटैक ?

जब भी हम कोई दिक्कत या परेशानी देखते हैं तो ज्यादा डर जातें हैं लेकिन ऐसा करना बिलकुल भी नहीं चाहिए होता हैं। अगर आप पर कोई डॉग हमला कर दे तो भागने के बजाय तुरन्त उसे डांटे, उस वक्त चाहे जितना भी डर रहें हो लेकिन चेहरे पर ना आने दे क्योंकि डॉग आपको डरा दिखेगा तो और अक्रामक होकर हमला करेगा। 

कोशिश करें की वहाँ से धीरे-धीरे ही बाहर निकले जल्दबाजी में नहीं। आसपास पड़ी चीजों (लकड़ी, पत्थर आदि) से कुत्ते को डराने का प्रयास करें। किसी ऐसे इलाके से जा रहें हैं जहाँ कुत्ते हमले करते ही रहते है वहाँ छड़ी जैसा उपकरण साथ लेकर जाएँ।

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