भारतीय टीम के खराब प्रदर्शन की ये है मुख्य वजह!

 मेरे पास दो खबरें हैं कल के मैच से जुड़ी हुई पहली ये की अपने किंग कोहली वापस से फॉर्म में आ गए हैं कल उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ 44 गेंदों में 60 रन ठोके वो भी तब जब टीम को इसकी सख्त जरुरत थी। दूसरी खबर ये कि king का अर्धशतक भी भारत को चिर-प्रतिद्वंदी पाकिस्तान के खिलाफ जीत नहीं दिला पाया और एशिया कप में भारत 8 साल बाद पाक से हार गया। लेकिन पाकिस्तान इस जीत का हक़दार भी था क्योंकि उनकी पूरी टीम मिलकर जीतने के लिए खेल रही थी जबकि भारतीय टीम अभी Experiments ही करने से बाज़ नहीं आ रही, यही Experiment ही भारत के हारने की मुख्य वजह बना।

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छोटे-छोटे मैचों में , सीरीजों में इंडिया ने कई खिलाड़ियों को आजमाया, कई खिलाड़ियों को कप्तान बनने का “बराबर मौका” भी दिया गया लेकिन नतीजा वही “ढाक के तीन पात” ही निकला। इतने प्रयोगों में कोच और कप्तान मिलकर भी एक मैच विजेता खिलाड़ी जो विपरीत परिस्थितियों में भी अकेले टीम इंडिया को संभाल सके, नहीं निकाल पाएं जिसका नतीजा कल का निराशजनक प्रदर्शन था।                                     सूर्य कुमार यादव जो हॉन्गकॉन्ग जैसी छोटी टीम के खिलाफ 261 की स्ट्राइक रेट से 26 गेंदों में 68 रन बना कर क्रिकेट के आसमान पर छाना चाहते हैं वो पाकिस्तान जैसे टीम के खिलाफ मात्र 10 गेंद खेलकर 13 रन बनाते हुए पेवेलियन लौट जाते हैं। दिनेश कार्तिक की जगह टीम में आए ऋषभ पंत भी जोश में आकर होश खोने वाला काम करतें हैं और गलत शॉट खेलकर टीम की मुश्किलों को थोड़ा और बढ़ा देतें हैं। अर्शदीप सिंह, रवि विश्नोई जैसे खिलाड़ियों को मोहम्मद शमी जैसे खिलाड़ियों पर वरियता देकर हम असंतुलित टीम प्रबंधन की ओर साफ इशारा करते हैं जिसका फायदा उठाना प्रतिद्वंदी अच्छे से जानते हैं। बूम बूम बुमराह की गैर मौजूदगी में गेंदबाज कुछ खास कमाल नहीं दिखा पा रहें हैं।

पिछले 8-10 महीने में इतने ही Captain हुए हैं टीम इंडिया के। कभी शिखर धवन , कभी जसप्रीत बुमराह, कभी पंत और कभी पांड्या, रोहित और कोहली को छोड़ ही देते हैं। टीम इंडिया के प्लेयर्स शायद ये समझ ही नहीं पाये की उन्हें खेलना किस Captain के अंडर हैं। खैर खिलाड़ियों की बात ही छोड़ दें , BCCI के इस प्रयोगात्मक रुख की वजह से टीम के Senior players तक ऊहापोह में रहें। एक निश्चित कप्तान ना होने की वजह से एक निश्चित टीम भी बनकर ना तैयार हो पाई जिससे ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ियों में भावनात्माक समझ का विकास नहीं हो पाया। युवा खिलाड़ियों और अनुभवी खिलाड़ियों का कम से कम प्रतिशत 50:50 का तो होना ही चाहिए था लेकिन नए चेहरों के बीच से शिखर धवन, मोहम्मद शमी , रहाणे , बुमराह जैसे अनुभवी खिलाड़ी गायब ही थे।  

क्रिकेटर्स की इतनी लम्बी फेहरिस्त हैं की लगता है BCCI “पहले आओ पहले पाओ” के आधार पर खिलाड़ी चुन रही है ताकि सबको बराबर मौका मिलता रहें।( ऐसा तो हमारे यहाँ गली क्रिकेट में होता हैं कि मैच की दिशा चाहे जो हो पूरी कोशिश रहती है की सभी खिलाड़ियों को खेलने का मौका मिले वरना जिसे खेलने को नहीं मिलता वो फील्डिंग करने से इंकार कर देता है।) अगर कोई खिलाड़ी एक दो मैच में नहीं परफॉर्म कर पाया तो तीसरे में उसे टीम के बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। ऐसे में सारे खिलाड़ी हिटर बनने की सोच रहें हैं कोई भी खिलाड़ी सपोर्टर नहीं बनना चाह रहा हैं। ऐसा कोई भी नया खिलाड़ी कल की मैच में इस Position में नहीं दिखा जो Stamps के इस छोर खड़े होकर सामने के छोर पर खड़े बल्लेबाज को धुंआधार खेलने के लिए प्रोत्साहित कर सका हो ये बता सका हो कि “तू फ़िक्र ना कर मैं इधर ही हूँ तेरे साथ तू खुल के खेल।” मज़बूरी में ये जिम्मेदारी हमारे Aggressive king के ऊपर आयी जिससे वो अपना विराट रूप दिखाने से बचते रहें।

Board नए-नए खिलाड़ियों को आजमाने में लगा रहा और Senior players बाहर छुट्टियां मनाने में व्यस्त रहें IPL खेलने के बाद से। ऐसे में एक बेहतरीन टीम पनप ही नहीं सकी और जब इन सब को जब एकजुट होकर प्रदर्शन करने का दबाव पड़ा तो नतीजतन ये लोग बिखर गए। 

ये सच है कि खिलाड़ियों की मानसिक स्वास्थ्यता ज्यादा जरुरी है तो उन्हें छुट्टियां मिलनी चाहिए लेकिन कब? ये भी तो BCCI को सोचना चाहिए क्योंकि IPL के टाइम तो कोई खिलाड़ी नहीं कहता की वो अपनी Mental health को ध्यान में रखकर आईपीएल नहीं खेलेगा। फिर किसी Series के समय या किसी दौरे के वक्त इनकी हेल्थ को क्या हो जाता हैं ? 


खैर जो हुआ सो हुआ आगे हमें BCCI से ये उम्मीद करनी चाहिए कि Worldcup के लिए वो एक बेहतर , अनुभवी, मजबूत और Supporting team का चयन करेगी, कोई ऐसा खिलाड़ी चुनेगी जो सर जडेजा का अच्छा विकल्प हो, और ऐसा कोई भी प्रयोग नहीं करेगी जो अब तक करती आ रही है। क्योंकि उसके किये प्रयोगों में सफलता कम असफलता ज्यादा ही मिली है। अब देखते है कल का मैच इस उम्मीद के साथ की एशिया कप इंडिया में ही आए ।

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