सर्दी


कुहरे की झीनी चादर में यौवन रूप छिपाये 

चौपालों पर 

मुस्कानों की आग उड़ाती जाये 

गाजर तोड़े मूली नोचे 

पके टमाटर खाये 

गोदी में इक भेड़ का बच्चा 

आँचल में 

सेब कुछ

धूप सखी की अँगुली पकड़े इधर-उधर मँडराये । -निदा फाजली

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