Kumar vishwash love poetry(कुमार विश्वास लव पोएट्री)

 एक मैं हूँ यहाँ एक तू है । 

एक मैं हूँ यहाँ, एक तू है सिर्फ़ साँसों की ही गुफ़्तगू है ,          चाँद के साज़ पर रोशनी गीत गाते हुए आ रही है            तेरी ज़ुल्फ़ों से छन कर वो देखो चाँदनी नूर बरसा रही है ,,  वक़्त यूँ ही ठहर जाए हमदम दिल को इतनी सी इक आरज़ू है ।


एक मैं हूँ यहाँ, एक तू है ।

दूर धरती के काँधे पे देखो मेरे ख़्वाबों में जो तैरती थी अप्सरा तू वही हू-ब-हू है

 एक मैं हूँ यहाँ, एक तू है ।

                                              कुमार विश्वास 

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