जॉन एलिया की शायरी “दिल जो दीवाना नहीं।”

 दिल जो दीवाना नहीं आख़िर को दीवाना भी था  भूलने पर उस को जब आया तो पहचाना भी था  जानिया किस शौक़ में रिश्ते बिछड़ कर रह गये  काम तो कोई नहीं था पर हमें जाना भी था  अजनबी-सा एक मौसम एक बेमौसम-सी शाम  जब उसे आना नहीं था जब उसे आना भी था  जानिये … Read more

“मुझे तुमसे मुहब्बत थी ” -निदा फाज़ली।

 एक ख़त  तुम आईने की आराइश में जब खोई हुई सी थीं   खुली आँखों की गहरी नींद में सोई हुई सी थीं  तुम्हें जब अपनी चाहत थी  मुझे तुमसे मुहब्बत थी । तुम्हारे नाम की ख़ुशबू से जब मौसम सँवरते थे  फ़रिश्ते जब तुम्हारे रात दिन लेकर उतरते थे  तुम्हें पाने की हसरत थी  मुझे … Read more

” उन आँखों में बुल्लेशाह गाता होगा” बाबूषा कोहली

 उन आँखों को कौन सुखा पाता होगा  उन आँखों में दरिया सुस्ताता होगा  उन आँखों में  डूबे जो इक बार कोई  उन आँखों से बाहर न आता होगा  उन आँखों में  एक पहेली उलझी है  उन आँखों को रब ही सुलझाता होगा  उन आँखों में  प्यास भरी है जन्मों की  उन आँखों का सावन अब … Read more

Kumar vishwash love poetry(कुमार विश्वास लव पोएट्री)

 एक मैं हूँ यहाँ एक तू है ।  एक मैं हूँ यहाँ, एक तू है सिर्फ़ साँसों की ही गुफ़्तगू है ,          चाँद के साज़ पर रोशनी गीत गाते हुए आ रही है            तेरी ज़ुल्फ़ों से छन कर वो देखो चाँदनी नूर बरसा रही है ,,  … Read more

“उनको भी गम होगा”- निदा फाज़ली

 जिनकी पलकें भीग रही हैं उनको भी ग़म होगा  लेकिन जिस पर आब न ठहरे वो मोती कम होगा मेरे गीतों जैसी जैसी तेरे फूलों की तहरीरें  धरती तेरे अंदर भी शायद कोई ग़म होगा  भीग चुकी है रात तो सूरज के उगने तक जागो  जिस तकिये पर सर रक्खोगे वो तकिया नम होगा  बादल, … Read more

‘सूअर के छौने’ अनुपम सिंह

 बच्चे चुरा आए हैं अपना बस्ता  मन ही मन छुट्टी कर लिये हैं आज ,  नहीं जाएँगे स्कूल झूठ-मूठ का बस्ता खोजते   बच्चे मन ही मन नवजात बछड़े-सा कुलाँच रहे हैं  उनकी आँखों ने देख लिया है  आश्चर्य का नया लोक  बच्चे टकटकी लगाए  आँखों में भर रहे हैं  अबूझ सौन्दर्य  सूअरी ने जने हैं … Read more