हिंदुस्तान ही तो है ! कुछ कड़वा मगर सच।

 अरे कैसे न गलती करे इन्सान ही तो है , 

ये एशो-आराम, ये रुतबा जाएगा कैसे नहीं …            मेहमान ही तो है ,,

हाँ जानते हैं मुंह से उल्टा-सीधा निकल जाता है यार !

फिसल जाती है जबान ही तो है ,

कब-तक बढ़ती महंगाई पर आह न भरोगे ? कब तक जिंदादिल बनोगे ? निकलेगी तो है ही जान ही तो है ,

बेकार की चींजे कोई घर में रखता है भला ! 

बेच लेने दो “कुछ पुराना सामान” ही तो है ,

किसके लिए सच बोलोगे ,जनता बहरी है जनाब … कोई फायदा नहीं उल्टे जाओगे जेल ….. देशद्रोह के आरोप में ,   इनमें तुम्हारा नुकसान ही तो है,

बस देश के लिए बना रहें हैं नये-नये प्रावधान                     इसमें आम आदमी थोड़ा सा परेशान ही तो है,

सुनो ,हम दुनिया खरीदना चाहते हैं इसमें अगर बिकता है तो बिक जाने दो, हिन्दुस्तान ही तो है ।       ✍🏻 me   

4 thoughts on “हिंदुस्तान ही तो है ! कुछ कड़वा मगर सच।”

Leave a comment