“महाशून्य” एक स्त्री के जीवन की दुःखद कथा।

 मिसेज सक्सेना के भव्य ड्राइंगरूम में प्रवेश करते ही लगा जैसे हम कश्मीर में आ गए हों। बाहर इतनी चिलचिलाती धूप थी कि गाड़ी एकदम भट्ठी की तरह तप रही थी। जब तक एसी अपना काम करता हम लोग पहुंच ही चुके थे। अपने गद्देदार सोफे में धंसकर मिसेज सक्सेना ने आवाज दी, “पारवती पानी … Read more

जया ‘नरगिस’ की गजल “बहरा पानी।”

 किसी की आँखों में सागर से भी गहरा पानी है  अब्र बनके जो दिल पर मेरे ठहरा पानी  बिना बुलाए ही आता है सूरते-सैलाब  पुकारे प्यास तो बन जाता है बहरा पानी  सुलगती धूप का तय तो सफर किया लेकिन  जहाँ उमीद थी निकला वहीं सहरा पानी  हवा के तेज़ थपेड़ों ने नाव जब उलटी  … Read more

‘वापसी’ रिश्तों के अजनबीपन की कहानी।

 ‘वापसी’ उषा प्रियमवदा की, रिश्तों की असली हकीकत उधेड के रख देने वाली कहानी है। एक ऐसी कहानी जो आज के समाज में लगभग हर बुजुर्ग के साथ घटित होती है। रेलवे से रिटायर्ड हुए गजाधर बाबू इस उम्मीद से घर जाते हैं कि अब बाकी की जिन्दगी आराम से अपने घर में बीवी-बच्चों के … Read more

“मुझे तुमसे मुहब्बत थी ” -निदा फाज़ली।

 एक ख़त  तुम आईने की आराइश में जब खोई हुई सी थीं   खुली आँखों की गहरी नींद में सोई हुई सी थीं  तुम्हें जब अपनी चाहत थी  मुझे तुमसे मुहब्बत थी । तुम्हारे नाम की ख़ुशबू से जब मौसम सँवरते थे  फ़रिश्ते जब तुम्हारे रात दिन लेकर उतरते थे  तुम्हें पाने की हसरत थी  मुझे … Read more

“दारोगाजी”- मुंशी प्रेमचंद की कहानी ।

 कल शाम को एक जरूरत से तांगे पर बैठा हुआ जा रहा था कि रास्ते में एक और महाशय तांगे पर आ बैठे। तांगेवाला उन्हें बैठाना न चाहता था, पर इनकार भी न कर सकता था। पुलिस के आदमी से झगड़ा कौन मोल ले। यह साहब किसी थाने के दारोगा थे। एक मुकदमे की पैरवी … Read more

हरिशंकर परसाई ,’ प्रेम की बिरादरी ।’

 उनका सब कुछ पवित्र है। जाति में बाजे बजाकर शादी हुई थी। पत्नी ने 7 जन्मों में किसी दूसरे पुरुष को नहीं देखा। उन्होंने अपने लड़के-लड़की की शादी सदा मंडप में की। लड़की के लिए दहेज दिया और लड़के के लिए लिया। एक लड़का खुद पसंद किया और उसे लड़की का पति बना दिया। एक … Read more

जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘रूप की छाया’

 काशी के घाटों की सौध-श्रेणी जाह्नवी के पश्चिम तट पर धवल शैल माला-सी खड़ी है। उनके पीछे दिवाकर छुप चुके। सीढ़ियों पर विभिन्न वेशभूषा वाले भारत के प्रत्येक प्रांत के लोग टल रहे हैं। कीर्तन, कथा और कोलाहल से जाह्नवी-तट पर चहल-पहल है।  एक युवती भीड़ से अलग एकांत में ऊँची सीढ़ी पर बैठी हुई … Read more

निदा फाज़ली की सुकून भरी कविता “एक बात”

 उसने  अपना पैर खुजाया  अँगूठी के नग को देखा  उठ कर  ख़ाली जग को देखा  चुटकी से एक तिनका तोड़ा चारपाई का बान मरोड़ा  भरे-पुरे घर के आँगन में  कभी-कभी वह बात!   जो लब तक आते-आते खो जाती है  कितनी सुन्दर हो जाती है!

“एक रात’’ रवींद्रनाथ टैगोर की कहानी

मैं बाल्यावस्था से ही सुरबाला के साथ पाठशाला जाया करता था तथा उसके साथ आंख-मिचौनी भी खेला करता था । मैं अक्सर उसके घर भी जाया करता था । उसकी मां मुझे बहुत स्नेह करती थीं। किसी-किसी दिन वे हम दोनों को एक साथ खड़ा करके निरख-निरख कर देखा करतीं और आपसी बातचीत में कहतीं … Read more

घुटन के पन्द्रह मिनट – हरीशंकर परसाई

 एक सरकारी दफ्तर में हम लोग एक काम से गए थे- संसद सदस्य तिवारी जी और मैं। दफ्तर में फैलते-फैलते यह खबर बड़े साहब के कानों तक पहुँच गई होगी कि कोई संसद सदस्य अहाते में आए हैं। साहब ने साहबी का हिदायतनामा खोलकर देखा होगा कि अगर संसद सदस्य दफ्तर में आए तो क्या … Read more